
सार
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई और जमाखोरी को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत अब गांवों में उपभोक्ताओं को दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर 45 दिन बाद ही मिलेगा। पहले यह अवधि लगभग 25 दिन के आसपास मानी जाती थी, लेकिन सरकार ने जमाखोरी और अनावश्यक बुकिंग रोकने के लिए इसमें 20 दिन की बढ़ोतरी कर दी है।
इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिलेंडर की उपलब्धता सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से पहुंच सके। वहीं मध्य प्रदेश में इस नई व्यवस्था के बीच ऑनलाइन LPG बुकिंग सिस्टम कुछ समय के लिए ठप होने की खबर भी सामने आई है, जिससे कई उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
विस्तार
सरकार और तेल कंपनियों को पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई क्षेत्रों में घरेलू गैस सिलेंडर की जमाखोरी की जा रही है। कुछ उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा जल्दी दूसरा सिलेंडर बुक कर लेते थे, जिससे अन्य लोगों के लिए सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित होती थी। इसी समस्या को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अब दूसरे सिलेंडर की बुकिंग के लिए 45 दिन का अंतर अनिवार्य किया गया है।
इस बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य गैस वितरण प्रणाली को संतुलित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि हर उपभोक्ता को समय पर सिलेंडर मिल सके। अधिकारियों का मानना है कि जब बुकिंग के बीच अधिक समय का अंतर रहेगा तो अनावश्यक स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति कम होगी और सप्लाई सिस्टम अधिक व्यवस्थित तरीके से काम करेगा।
इसी बीच मध्य प्रदेश के कई हिस्सों से खबर आई है कि ऑनलाइन LPG बुकिंग सिस्टम अस्थायी रूप से ठप हो गया, जिससे उपभोक्ताओं को बुकिंग कराने में दिक्कतें आईं। कई लोगों को फोन या एजेंसी के माध्यम से बुकिंग कराने का विकल्प अपनाना पड़ा। तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए संबंधित एजेंसियां काम कर रही हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि सिस्टम जल्द सामान्य हो जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर उज्ज्वला योजना के बाद बड़ी संख्या में नए कनेक्शन जुड़े हैं। ऐसे में सप्लाई को संतुलित रखने के लिए समय-समय पर वितरण व्यवस्था में बदलाव किए जाते हैं। हालांकि कुछ उपभोक्ताओं का मानना है कि बुकिंग के बीच ज्यादा अंतर होने से कभी-कभी गैस खत्म होने की स्थिति में परेशानी भी हो सकती है।
फिलहाल सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह उपभोक्ताओं के हित और गैस वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है। आने वाले समय में स्थिति की समीक्षा के बाद इस व्यवस्था में जरूरत पड़ने पर बदलाव भी किया जा सकता है।









