सीहोर EXCLUSIVE: भेरूंदा प्रशासन की लापरवाही उजागर, बिना लाइफ जैकेट श्रद्धालुओं से भरी नावें नर्मदा में दौड़ती रहीं, क्या बरगी जैसे हादसे का इंतजार?

सीहोर: भेरूंदा क्षेत्र में शनिवार अमावस्या और शनि जयंती के पावन अवसर पर नर्मदा घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ा, लेकिन इस भीड़ के बीच प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल भी खुलकर सामने आ गई। नीलकंठ स्थित प्रसिद्ध कौशल्या संगम तट सहित मंडी, सिलकंठ, सातदेव, चोरसाखेड़ी, रानीपुरा और छीपानेर घाटों पर हजारों श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा भगवान भरोसे नजर आई।

सुबह से ही घाटों पर भारी भीड़ जुटने लगी थी। श्रद्धालु मां नर्मदा में स्नान कर पुण्य लाभ लेने और मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिचर अमावस्या और शनि जयंती का विशेष महत्व होने के कारण घाटों पर सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक भीड़ रही। महिलाओं ने वट सावित्री अमावस्या पर वट और पीपल वृक्ष की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना की। पूरा क्षेत्र भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा दिखाई दिया।

लेकिन इस धार्मिक आयोजन के बीच सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर खड़ा हुआ। नीलकंठ के कौशल्या संगम तट पर श्रद्धालुओं को नदी पार कराने के लिए नावों का संचालन किया जा रहा था। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार नावों में क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां बैठाई जा रही थीं। एक नाव में 40 से 50 लोगों को बैठाकर नदी पार कराई जा रही थी, जबकि यात्रियों से प्रति व्यक्ति 10 से 20 रुपए तक वसूले जा रहे थे। सबसे गंभीर बात यह रही कि नावों में लाइफ जैकेट, सुरक्षा रस्सियां या अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण तक मौजूद नहीं थे।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि भेरूंदा एसडीएम द्वारा पूर्व में सुरक्षा को लेकर निर्देश दिए गए थे, लेकिन नाव संचालकों ने उन निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा दीं। घाटों पर प्रशासनिक निगरानी लगभग नदारद रही। प्रशासन की ओर से पुलिस बल, पटवारी और कोटवार तैनात किए जाने का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हालात अलग तस्वीर पेश करते नजर आए। श्रद्धालुओं और ग्रामीणों का कहना है कि “तैनाती” केवल फोटो खींचकर अधिकारियों को भेजने तक सीमित रह गई, जबकि मौके पर न तो पर्याप्त पुलिसकर्मी दिखाई दिए और न ही कोई प्रशिक्षित गोताखोर या होमगार्ड मौजूद था।

यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि जबलपुर के बरगी बांध में हुई क्रूज दुर्घटना के बाद प्रदेशभर में जल सुरक्षा को लेकर कई निर्देश जारी किए गए थे। बावजूद इसके, नर्मदा घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डालकर नाव संचालन जारी रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर अमावस्या और विशेष पर्व पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, फिर भी प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रहता है। लोगों ने आशंका जताई कि यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता।

ग्राम पंचायत नीलकंठ के सरपंच संतोष वर्मा ने स्वीकार किया कि अमावस्या से पहले नाविकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नावों में सीमित सवारियां बैठाई जाएं और सुरक्षा के सभी नियमों का पालन हो। बावजूद इसके नाव संचालकों ने नियमों की अनदेखी करते हुए एक साथ 30 से 40 लोगों को बैठाकर नदी पार कराई। उन्होंने माना कि पंचायत की समझाइश का पालन नहीं हुआ, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

वहीं भेरूंदा एसडीएम सुधीर कुशवाह का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे और प्रमुख घाटों पर प्रशासनिक अमला तैनात था। हालांकि मौके की तस्वीरें और स्थानीय लोगों के आरोप प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आस्था के इस बड़े आयोजन के बीच सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही को कटघरे में ला खड़ा किया है।

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  • Sehore Nilkanth Ghat Boat Safety Negligence Exclusive Report
  • Rashel Kachwah Rajput

    Rashel Kachwah Rajput

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