
हाल में जारी SIR 2.0 प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और आलोचकों ने ‘मोबाइल वोटरों / मामूली मतदाताओं को सूची से हटाने’ यानी “mass disenfranchisement” (वोट वंचित करना) का आरोप लगाया था। लेकिन चुनाव आयोग ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी जवाबी हलफनामा में बताया कि पश्चिम बंगाल में 99.77% मतदाताओं को प्री‑फिल्ड एन्यूमरेशन फॉर्म (voter enumeration form) भेजे गए थे, और करीब 70.14% फॉर्म वापस मिले।
उसी तरह तमिलनाडु में भी सर्वाधिक मतदाताओं को फॉर्म दिए जा चुके हैं। EC ने स्पष्टीकरण दिया कि SIR एक नियमित, संवैधानिक प्रक्रिया है, और इसमें किसी भी मतदाता को बिना सही प्रक्रिया के हटाया नहीं जाएगा।
आयोग ने कहा कि जो लोग अपनी जानकारी अपडेट नहीं कर पाए — जैसे कि मृत्यु, स्थानांतरण, या डुप्लिकेशन के कारण — उन्हें हटाया गया; इसे मतदाता वंचना नहीं माना जाना चाहिए। इस तरह के वादों को “politically motivated, speculative and highly exaggerated” करार दिया गया है।
साथ ही, आयोग ने यह भी कहा कि हर बूथ‑स्तर अधिकारी (BLO) को कम‑से‑कम तीन बार घर का दौरा करना होगा, और यदि घर बंद मिला तो नोटिस छोड़नी होगी — परिणामस्वरूप, enumeration का दायरा व्यापक रखा गया है।

