
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की कथित हत्या के मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की आधिकारिक चुप्पी को तटस्थता के रूप में नहीं देखा जा सकता।
क्या कहा सोनिया गांधी ने?
अपने हालिया बयान में उन्होंने संकेत दिया कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश को वैश्विक घटनाओं पर स्पष्ट और संतुलित दृष्टिकोण रखना चाहिए। उनके अनुसार, विदेश नीति केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें नैतिक और कूटनीतिक संदेश भी निहित होते हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संसद में इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश की विदेश नीति की दिशा और प्राथमिकताओं पर पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार का रुख क्या है?
केंद्र की ओर से इस विशेष घटना पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार पहले भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मामलों में संयम, संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर देती रही है। भारत पारंपरिक रूप से संतुलित विदेश नीति अपनाता रहा है, जिसमें सभी पक्षों से संवाद बनाए रखना प्राथमिकता मानी जाती है।
व्यापक संदर्भ
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग के संबंध रहे हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक सोच पर पड़ सकता है। राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं, जो आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकते हैं।









