
अमेरिकी राजनीति में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट से एक एआई-जनरेटेड वीडियो साझा किया गया। इस वीडियो में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को बंदरों के रूप में दिखाया गया था, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इस पोस्ट की निंदा करते हुए इसे नस्लवादी और अपमानजनक बताया। उनका कहना था कि इस तरह की सामग्री न सिर्फ राजनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।
विवाद बढ़ने के बाद यह वीडियो कुछ समय के भीतर हटा लिया गया। ट्रंप की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जबकि उनके समर्थकों ने इसे राजनीतिक हमला बताया। वहीं, आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं को इस तरह की सामग्री साझा करने से बचना चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर राजनीति में एआई के इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी और चुनावी माहौल में डिजिटल कंटेंट के प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई-जनरेटेड सामग्री का दुरुपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सामाजिक सौहार्द पर असर डाल सकता है।









