
अमेरिका ने रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नए प्रतिबंध बिल को डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इसका असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं रहेगा। बिल में ऐसे प्रावधान शामिल हैं, जिनसे रूस के साथ व्यापार करने वाले अन्य देशों पर भी भारी आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
इस प्रतिबंध बिल का सबसे विवादित पहलू यह है कि भारत जैसे देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने का खतरा जताया जा रहा है। यदि कोई देश रूस से ऊर्जा, रक्षा या अन्य अहम क्षेत्रों में व्यापार जारी रखता है, तो उस पर भारी शुल्क लगाया जा सकता है। इससे वैश्विक व्यापार संतुलन और द्विपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका है।
जानकारी के मुताबिक, इस बिल को अगले हफ्ते अमेरिकी संसद में वोटिंग के लिए पेश किया जाएगा। यदि संसद से इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह रूस के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े आर्थिक कदमों में से एक माना जाएगा। साथ ही, अमेरिका की इस नीति से उसके सहयोगी और साझेदार देशों के सामने भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए तनाव पैदा कर सकता है। खासकर उन देशों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जो ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं। अब सभी की नजर संसद की वोटिंग और उसके बाद अमेरिका की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।

