
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पहल पर आयोजित “बोर्ड ऑफ पीस” बैठक में भारत सहित 50 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस वैश्विक मंच का मुख्य फोकस गाजा क्षेत्र में मानवीय संकट को लेकर राहत और पुनर्निर्माण के उपायों पर रहा। बैठक में गाजा के लिए लगभग ₹1.5 लाख करोड़ के बड़े राहत पैकेज की घोषणा की गई, जिसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग से लागू करने की योजना है।
बैठक में भारत की भागीदारी को महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। भारत लंबे समय से मानवीय सहायता और वैश्विक शांति पहलों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। गाजा संकट जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भारत की मौजूदगी यह संकेत देती है कि वह पश्चिम एशिया के मानवीय और स्थिरता प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है।
विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े राहत पैकेज का उद्देश्य केवल आपात सहायता नहीं, बल्कि गाजा के बुनियादी ढांचे और नागरिक जीवन के पुनर्निर्माण को गति देना है। इसमें आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्स्थापन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा सकती है। 50 देशों की भागीदारी से यह पहल बहुपक्षीय सहयोग का उदाहरण मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, “बोर्ड ऑफ पीस” बैठक और गाजा राहत पैकेज की घोषणा वैश्विक कूटनीति में एक बड़े मानवीय प्रयास के रूप में देखी जा रही है। भारत की सक्रिय भागीदारी से यह संकेत भी मिलता है कि वह अंतरराष्ट्रीय शांति और राहत अभियानों में अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहता है।









