
दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बार फिर अस्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ी नीतियों और संभावित फैसलों को लेकर वैश्विक बाजारों में चर्चा तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से करीब $6.7 लाख करोड़ की वैश्विक संपत्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है।
इसी आशंका के बीच कई देशों द्वारा बड़े पैमाने पर सोना खरीदने की प्रवृत्ति तेज हो गई है। केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिसे आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर भरोसा कमजोर होता है, तो देश सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं।
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह स्थिति केवल अमेरिका की नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का भी संकेत है। अगर बड़े पैमाने पर संपत्ति जब्ती या प्रतिबंध लागू होते हैं, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मुद्रा बाजार और निवेश पर गहरा पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के अंदरखाने चल रही यह उथल-पुथल भविष्य की वैश्विक आर्थिक रणनीति का संकेत हो सकती है। आने वाले समय में सोने की कीमतों, डॉलर की स्थिति और देशों की वित्तीय नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।









