
महाराष्ट्र की राजनीति में आज बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आज औपचारिक रूप से अपने गठबंधन का ऐलान करेंगे। करीब 20 साल बाद दोनों ठाकरे भाई एकसाथ चुनाव लड़ने जा रहे हैं, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने तय माने जा रहे हैं। इस गठबंधन को जनवरी 2026 में होने वाले 29 नगर निगम चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां दोनों दल संयुक्त ताकत के साथ उतरने की तैयारी में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, यह गठबंधन शहरी राजनीति पर खास फोकस करेगा। मुंबई, पुणे, ठाणे, नाशिक और नागपुर जैसे बड़े नगर निगमों में मराठी वोट बैंक को एकजुट करना इसकी मुख्य रणनीति मानी जा रही है। बीते वर्षों में अलग-अलग रास्तों पर चलने वाले उद्धव और राज ठाकरे अब साझा मंच पर आकर स्थानीय मुद्दों, नगर प्रशासन और शहरी विकास को चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम सिर्फ नगर निगम चुनावों तक सीमित नहीं रहेगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आगे चलकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। 20 साल बाद ठाकरे परिवार का यह राजनीतिक मेल महाराष्ट्र की राजनीति में भावनात्मक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा संदेश देता है।
विपक्ष और सत्ताधारी दल इस ऐलान पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। गठबंधन की घोषणा के बाद सीट शेयरिंग, साझा न्यूनतम कार्यक्रम और नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। जनवरी 2026 के नगर निगम चुनाव इस नए ठाकरे गठबंधन की पहली बड़ी परीक्षा होंगे, जो महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

