
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर करीब आठ साल बाद चीन के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिमी देशों और चीन के रिश्तों में लगातार तनाव देखने को मिल रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने चीन के साथ संबंधों को लेकर संतुलित रुख अपनाने की बात कही और संकेत दिया कि वैश्विक राजनीति में चीन की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दौरे के दौरान स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन के लिए चीन के साथ संवाद और सहयोग राष्ट्रीय हित से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन इन्हें बातचीत और व्यावहारिक नीति के जरिए संभालना जरूरी है। उनका बयान इस बात का संकेत है कि ब्रिटेन अब चीन के साथ रिश्तों को पूरी तरह टकराव की दिशा में नहीं ले जाना चाहता, बल्कि एक “परिपक्व रणनीति” अपनाना चाहता है।
इस यात्रा को वैश्विक राजनीति के बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि ब्रिटेन अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार, तकनीक और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चीन के साथ संवाद बढ़ाना ब्रिटेन की नई विदेश नीति का हिस्सा हो सकता है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री की चीन यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, यह भी साफ है कि ब्रिटेन चीन के साथ सहयोग के साथ-साथ अपने रणनीतिक हितों और पश्चिमी गठबंधन की प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखेगा। आने वाले दिनों में इस दौरे से जुड़े समझौते और घोषणाएं वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती हैं।









