
मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख इंडेक्स डाउ जोंस लगभग 453 अंक गिरकर 47,501 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिमों के कारण बाजार में बिकवाली का माहौल देखा गया।
विश्लेषकों के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई कारण रहे। सबसे बड़ा कारण ईरान-इजराइल युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है। मध्य-पूर्व तेल उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है और वहां किसी भी प्रकार का संघर्ष वैश्विक आपूर्ति पर असर डाल सकता है। तेल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इसके अलावा अमेरिका में बेरोजगारी दर से जुड़े ताजा आंकड़ों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। रोजगार बाजार में कमजोरी के संकेत मिलने से यह आशंका बढ़ जाती है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी हो सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं, जिससे शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और गहरा हो सकता है। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, व्यापार मार्गों पर जोखिम और निवेशकों की सतर्कता आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल दुनिया भर के निवेशक युद्ध और आर्थिक आंकड़ों से जुड़ी हर खबर पर नजर बनाए हुए हैं।









