
नवंबर महीने में थोक महंगाई दर (WPI) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई माइनस 0.32% पर पहुंच गई, जबकि अक्टूबर में यह माइनस 1.21% थी। यानी एक महीने में महंगाई में साफ उछाल देखने को मिला है, जिसकी बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी बताई जा रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से डिफ्लेशन का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है। खासतौर पर सब्जियां, अनाज और प्रोसेस्ड फूड आइटम्स की कीमतों में इजाफा देखने को मिला, जिसका सीधा असर थोक महंगाई दर पर पड़ा। इसके अलावा, कुछ मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और कच्चे माल की लागत में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि थोक महंगाई अभी भी निगेटिव जोन में बनी हुई है, लेकिन लगातार दो महीनों में सुधार को इकोनॉमिक रिकवरी का संकेत माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर खाद्य कीमतों का यह ट्रेंड जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में WPI पॉजिटिव जोन में लौट सकती है। वहीं, इस डेटा पर RBI और पॉलिसी मेकर्स की भी नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर आगे चलकर रिटेल महंगाई और ब्याज दरों पर पड़ सकता है।


