
अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि ट्रम्प ऐसे शख्स को व्हाइट हाउस क्यों बुलाना चाहते हैं, जिसे विरोधी खेमे में ‘कोकीन तस्कर’ तक कहा जा रहा है। इस मुद्दे ने न सिर्फ अमेरिका, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस को जन्म दे दिया है।
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि ट्रम्प और संबंधित नेता के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। इस लंबी चर्चा के बाद व्हाइट हाउस बुलावे की अटकलें तेज हो गईं। हालांकि बातचीत के एजेंडे को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे रणनीतिक और कूटनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
आलोचकों का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को व्हाइट हाउस बुलाना अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। उनका आरोप है कि ट्रम्प विवादित चेहरों के साथ संवाद कर राजनीतिक फायदे या सौदेबाजी की रणनीति अपनाते हैं। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संवाद जरूरी होता है, चाहे सामने वाला कितना भी विवादित क्यों न हो।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम ट्रम्प की अलग तरह की डिप्लोमेसी को दर्शाता है, जहां वह पारंपरिक सोच से हटकर फैसले लेते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह मुलाकात वाकई होती है और अगर होती है, तो इसके राजनीतिक और वैश्विक स्तर पर क्या मायने निकलते हैं।

