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ग्वालियर में कॉर्पोरेट का जमावड़ा या चुनावी चंदे की ‘सेटिंग’? 2 लाख करोड़ के ‘शिलान्यास’ के बीच सिसकते छोटे व्यापारी और स्टार्टअप्स!

ग्वालियर/भोपाल: मध्य प्रदेश कीअभ्युदय ग्रोथ समिटके नाम पर ग्वालियर में आज जो आलीशान मंच सजा है, वह विकास का नया अध्याय है या बड़े घरानों को खुश करने कामेगा इवेंट‘? गृह मंत्री अमित शाह 2 लाख करोड़ रुपये के उद्योगों का शिलान्यास करने पहुंचे हैं, बड़ेबड़े उद्योगपति चार्टर्ड प्लेन से उतर रहे हैं, लेकिन इसी चकाचौंध के पीछे प्रदेश का छोटा व्यापारी और उभरता हुआ स्टार्टअप दम तोड़ रहा है।

बड़े घरानों परप्यारकी बारिश, छोटे व्यापारी को सिर्फतारीख

जब अमित शाह और मुख्यमंत्री मोहन यादव मंच सेविकसित मध्य प्रदेशका नारा बुलंद कर रहे हैं, तब सवाल उठता है कि क्या ये विकास सिर्फ अडानी, अंबानी या टाटा जैसे दिग्गजों के लिए है?

     सच्चाई का आईना: क्या यह उद्योगों के प्रतिप्रेमहै या आने वाले समय के लिएट्रस्टमें जमा होने वाले चंदे की तैयारी?

     जमीनी हकीकत: प्रदेश के छोटे उद्योगों (MSMEs) की हालत यह है कि वे बिजली बिल, टैक्स और इंस्पेक्टर राज की मार से उबर नहीं पा रहे हैं।

स्टार्टअप्स: पॉलिसीकागजों पर, ‘मददसिर्फ भाषणों में

सरकार नेस्टार्टअप पॉलिसी 2025′ के बड़ेबड़े दावे किए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इंदौर और भोपाल के बाहर एक भी ढंग का इनक्यूबेशन सेंटर नहीं है।

  1. फंडिंग का अकाल: बड़े उद्योगों को सब्सिडी और करोड़ों की जमीनसिंगल क्लिकपर मिल रही है, लेकिन एक युवा स्टार्टअप को 10 लाख के लोन के लिए बैंक के 10 चक्कर काटने पड़ते हैं। 
  1. इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव: टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली और लॉजिस्टिक्स की कमी स्टार्टअप्स की कमर तोड़ रही है।
  1. सरकारी खरीद में अनदेखी: छोटे व्यापारियों के लिए सरकारी टेंडर की शर्तें ऐसी बनाई जाती हैं कि सिर्फबड़ी मछलियांही जाल में फंसें।

जनता पूछ रही है सवाल: हमारा क्या होगा?

मध्य प्रदेश की जनता और छोटे व्यापारी पूछ रहे हैं कि जब 2 लाख करोड़ के निवेश का जश्न मन रहा है, तो उसआम आदमीके लिए क्या है जिसने अपना छोटा सा धंधा शुरू करने के लिए अपना घर गिरवी रखा है?

     चंदा वर्सेस धंधा: क्या यह समिट सिर्फ कॉर्पोरेट लॉबिंग का अड्डा बन गई है

     रोजगार का छलावा: दावा 1.93 लाख नौकरियों का है, लेकिन क्या ये नौकरियां वाकई स्थानीय युवाओं को मिलेंगी या बस डेटा की बाजीगरी बनकर रह जाएंगी?

चमक के पीछे का अंधेरा

ग्वालियर का मेला मैदान आज करोड़ों की सौगातों से गूंज रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश के लाखों छोटे दुकानदार और स्टार्टअप फाउंडर्स के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं। सरकार को समझना होगा कि अर्थव्यवस्था सिर्फबुलसे नहीं, बुनकरोंऔरछोटे व्यापारियोंके पसीने से भी चलती है। अगर आज इन्हें नज़रअंदाज़ किया गया, तो यहग्रोथ समिटइतिहास में सिर्फ एककॉर्पोरेट पिकनिकबनकर रह जाएगी।

gaurav
Author: gaurav

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    One thought on “ग्वालियर में कॉर्पोरेट का जमावड़ा या चुनावी चंदे की ‘सेटिंग’? 2 लाख करोड़ के ‘शिलान्यास’ के बीच सिसकते छोटे व्यापारी और स्टार्टअप्स!

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