
भोपाल में आयोजित सम्मेलन में मध्य प्रांत के प्रांत प्रचारक ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता का दिया मंत्र
भोपाल। राजधानी भोपाल में संपन्न हुए ‘विश्व हिंदू सम्मेलन‘ के समापन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मध्य प्रांत के प्रांत प्रचारक माननीय विमल गुप्ता जी ने समाज को एकता और अखंडता का एक नया विजन दिया। अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ की सोच समाज को बांटने की नहीं, बल्कि ‘एक राष्ट्र, एक समाज‘ के भाव से एकजुट करने की है।
विरोध नहीं, सबको साथ लेकर चलना ही लक्ष्य
विमल गुप्ता जी ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “विश्व हिंदू सम्मेलन का आयोजन किसी धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि हिंदू समाज को संगठित करने और उसे राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किया गया है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक समाज में एकता का सूत्र मजबूत नहीं होगा, तब तक राष्ट्र की अखंडता को अक्षुण्ण रखना चुनौतीपूर्ण है।
एकता और जागरूकता से ही संभव है राष्ट्र निर्माण
सभागार में उपस्थित प्रबुद्धजनों, माताओं और बहनों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि:
· जागरूकता: समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूक होना अनिवार्य है।
· सद्भाव: जातियों और पंथों से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
· राष्ट्र प्रथम: राष्ट्र निर्माण तभी संभव है जब हर नागरिक के मन में व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर ‘राष्ट्र प्रथम‘ का भाव हो।
श्रोताओं के बीच उपजा एकता का संकल्प
विमल जी के विचारों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम के अंत में पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव से भर गया। उनके सरल और स्पष्ट संवाद ने यह संदेश दिया कि संघ का ध्येय विश्व कल्याण और भारतीय संस्कृति का संरक्षण है।







