ब्रांणवाणी EXCLUSIVE: हाई-वोल्टेज चुनाव के बाद आज काउंटिंग डे, 5 राज्यों में सियासी समीकरण तय करेगी जनता का जनादेश

कोलकाता/चेन्नई/तिरुवनंतपुरम/गुवाहाटी: देश के पांच अहम राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आज सोमवार को घोषित किए जा रहे हैं। सुबह 8 बजे से सभी मतगणना केंद्रों पर काउंटिंग शुरू हो चुकी है, जहां कुल 824 सीटों के भविष्य का फैसला होगा।

निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जा रही है, जिसके बाद ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू होगी। शुरुआती रुझान पहले एक-दो घंटे में सामने आने लगेंगे, जबकि दोपहर तक तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है। शाम तक सभी राज्यों के अंतिम नतीजे घोषित किए जा सकते हैं।

इन पांच राज्यों में मतदान अप्रैल महीने में अलग-अलग चरणों में पूरा हुआ था। असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई थी, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ। पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में कराए गए थे। मतदान प्रतिशत की बात करें तो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 92% से अधिक वोटिंग दर्ज की गई, जो इस बार के चुनाव का मुख्य आकर्षण रही। इसके अलावा असम में 85.38%, तमिलनाडु में 84.69%, केरल में 79.63% और पुडुचेरी में 89.87% मतदान हुआ।

क्या दीदी बचा पाएगी सत्ता कुर्सी

पश्चिम बंगाल में सबसे हाई-वोल्टेज मुकाबला देखने को मिला, जहां सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर रही। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा राज्य में सत्ता परिवर्तन की कोशिश में है। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। मतदान दो चरणों में कराया गया, जिसमें रिकॉर्ड 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ। यह भारी मतदान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि जनता बदलाव या मजबूती के साथ सरकार चुनने के मूड में है। चुनाव प्रचार के दौरान कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, केंद्र-राज्य टकराव और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। ममता बनर्जी ने अपनी सामाजिक योजनाओं और क्षेत्रीय पहचान को मुद्दा बनाया, जबकि भाजपा ने विकास, भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय नेतृत्व के नाम पर वोट मांगा।

सीएम हेमंत पर फिर असम की जनता करेगी विश्वास

असम में इस बार का चुनाव राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। यहां सत्तारूढ़ NDA गठबंधन अपनी सरकार बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनौती दे रहे हैं। राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान हुआ, जिसमें 85.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। असम में चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहे – पहचान, नागरिकता, बाढ़ की समस्या, विकास और रोजगार। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में NRC और CAA जैसे मुद्दे भी चुनावी चर्चा में खूब उठाए। सत्तारूढ़ पक्ष ने विकास और स्थिरता को मुद्दा बनाया, जबकि विपक्ष ने स्थानीय समस्याओं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। आज के नतीजे तय करेंगे कि क्या NDA अपनी पकड़ बनाए रखेगा या असम में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे।

केरल की सत्ता से LDF को हटा पाएंगे UDF

केरल में त्रिकोणीय मुकाबला रहा, जहां एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच सीधी टक्कर है। एलडीएफ लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश में है, जबकि यूडीएफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने की उम्मीद कर रही है। सीएम पिनाराई विजयन ने कहा है कि इस बार का चुनाव हमारी पार्टी ही जीतेगी. प्रदेश की जनता हम पर भरोषा करती है और चुनाव हमारे पक्ष में ही होगा. वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के कार्यकर्ता ने दबा किया है की 140 सीटों में से करीब 100 सीट हमारी पार्टी जीत रही है. आपको बता दे कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 9 साल, 343 दिनों से सीएम है. 

क्या विजय थलापति बना पाएंगे तमिलमनाडू के किंग मेकर

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके और एआईएडीएमके के बीच मुख्य मुकाबला है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी सरकार के कामकाज के आधार पर दोबारा जनादेश मांग रहे हैं, जबकि विपक्ष वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है. इस बार का चुनाव तमिलनाडू फिल्मी अंदाज में होने जा रहा है क्योकि इस बार की सबसे बड़ी वजह हैं साउथ के मेगास्टार विजय थलापति. उनकी राजनीतिक एंट्री ने चुनाव को और ज्यादा दिलचस्प और अनिश्चित बना दिया है. थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने राज्य में अलग ही माहौल बना कर रखा है. भले ही उनकी पार्टी हर सीट पर सीधे मुकाबले में न हो, लेकिन उनका प्रभाव कई सीटों पर “गेम-चेंजर” माना जा रहा है.  विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं, पहली बार वोट करने वाले मतदाताओं और शहरी वर्ग में काफी मजबूत मानी जाती है. उनकी फिल्मों में दिखाई जाने वाली “सिस्टम के खिलाफ लड़ाई” और “सामाजिक न्याय” की छवि को उन्होंने अपने राजनीतिक संदेश से जोड़ने की कोशिश की है. यही वजह है कि उनकी सभाओं में बड़ी भीड़ देखने को मिली और सोशल मीडिया पर भी उनका जबरदस्त प्रभाव रहा. विजय का असर सीधे तौर पर सीट जीतने से ज्यादा “वोट कटिंग” और “वोट ट्रांसफर” में दिख सकता है. आपको बता दें कि राज्य की 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ, जिसमें लगभग 84.69 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई.

पुडुचेरी में NDA की होगी सत्ता में वापसी

पुडुचेरी भले ही छोटा केंद्र शासित प्रदेश हो, लेकिन यहां की राजनीति हमेशा से गठबंधन आधारित रही है. यहां कुल 30 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान हुआ, जिसमें 89.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. यहां मुकाबला मुख्य रूप से NDA और विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) के बीच है.  चुनाव के दौरान स्थानीय विकास, रोजगार, पर्यटन, प्रशासनिक स्थिरता और केंद्र-प्रदेश संबंध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे.  पुडुचेरी में अक्सर सरकारें गठबंधन के सहारे बनती हैं, इसलिए यहां का जनादेश काफी महत्वपूर्ण होता है. आज के नतीजे यह तय करेंगे कि यहां कौन सा गठबंधन सत्ता में आएगा और राजनीतिक स्थिरता कैसी रहेगी. 

ये भी पढ़े – ब्रांणवाणी Exclusive: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बना नया इतिहास, 79 साल के सभी रिकॉर्ड टूटे, दो चरणों में 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज; अब 4 मई के नतीजों पर नजर

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Rashel Kachwah Rajput

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