ब्रांणवाणी Exclusive: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बना नया इतिहास, 79 साल के सभी रिकॉर्ड टूटे, दो चरणों में 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज; अब 4 मई के नतीजों पर नजर

कोलकाता:  पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के साथ ही बंगाल ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पिछले 79 वर्षों के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण में बुधवार को 91.66% मतदान दर्ज किया गया है।

2011 का रिकॉर्ड भी पड़ा पीछे

चुनाव आयोग ने पुष्टि की है कि पहले चरण के 93.19% और दूसरे चरण के 91.66% मतदान को मिलाकर, राज्य का कुल औसत मतदान 92.47% रहा है। यह आंकड़ा साल 2011 में दर्ज किए गए 84.72% के पिछले सर्वकालिक रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। प्रशासनिक गलियारों में इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ के तौर पर देखा जा रहा है।

आधी आबादी ने दिखाई ताकत

इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी रही। लैंगिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ते हुए 92.28% मतदान किया, जबकि पुरुषों का आंकड़ा 91.07% रहा। वहीं, थर्ड-जेंडर मतदाताओं ने भी 91.28% की प्रभावी भागीदारी दर्ज कराई।

हाई-टेक निगरानी और सुरक्षा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों एस. एस. संधूविवेक जोशी ने दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से 100% लाइव वेबकास्टिंग के जरिए मतदान केंद्रों की निगरानी की। आयोग ने मतदान को सुगम बनाने के लिए इस बार कई नए प्रयोग किए थे,

जिनमें में प्रमुख तीन थे:-

1. EVM पर रंगीन फोटो: उम्मीदवारों की पहचान आसान बनाने के लिए पहली बार बैलेट पेपर पर रंगीन फोटो का इस्तेमाल हुआ।

2. भीड़ नियंत्रण: प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1,200 तक सीमित की गई।

3. PwD सुविधाएं: दिव्यांगों के लिए मुफ्त परिवहन, व्हीलचेयर और समर्पित स्वयंसेवकों की व्यवस्था की गई।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा में क्या हुई बंपर वोटिंग

1. साइलेंट वोटर का दबदबा? –  92.47% जैसा भारी मतदान अक्सर ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-incumbency) या फिर ‘मजबूत सत्ता समर्थन’ (Pro-incumbency) का संकेत होता है। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का निकलना (92.28%) यह बताता है कि लक्ष्मी भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा के मुद्दों ने मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक खींचने में बड़ी भूमिका निभाई है।

2. हिंसा मुक्त चुनाव की ओर कदम –  अतीत के मुकाबले इस बार निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे। राज्य के संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की 1,000 से अधिक कंपनियों की तैनाती की गई थी। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर, दोनों चरणों में मतदान प्रक्रिया काफी हद तक शांतिपूर्ण रही, जो बंगाल के चुनावी इतिहास में एक सकारात्मक बदलाव है।

3. 4. युवा मतदाताओं का जोश –  इस बार करीब 15 लाख नए (First-time) मतदाता शामिल हुए थे। सोशल मीडिया पर ‘Selfie with Ink’ कैंपेन का असर ग्रामीण इलाकों में भी देखा गया, जिससे मतदान प्रतिशत आजादी के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

4. महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा – पश्चिम बंगाल  के चुनाव में महिला सुरक्षा भी अहम मुद्दा रहा है. 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के बाद बंगाल में काफी रोष देखने को मिला है. प्रदेश की महिलाओं ने सुरक्षा के मुद्दों पर कई पर बात की है पर कोई ठीक समाधान नही निकला. जिस कारण से महिलाओं ने भी इस चुनाव में बंपर वोटिंग की है 

4 मई पर सबकी नजर

दूसरे चरण की 142 सीटों पर हुए मतदान के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के बीच चल रहे इस भीषण राजनीतिक संग्राम का फैसला अब EVM में कैद हो गया है। 24 जिलों की कुल 294 सीटों पर हुए इस चुनाव के नतीजे 4 मई, 2026 को घोषित किए जाएंगे।

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  • Rashel Kachwah Rajput

    Rashel Kachwah Rajput

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