
बेंगलुरु: अध्यात्म और सेवा की वैश्विक संस्था ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ ने रविवार को बेंगलुरु में अपनी स्थापना की 45वीं वर्षगांठ का भव्य समारोह आयोजित किया। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिनका स्वागत संस्था के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने किया।
प्रधानमंत्री का अभिनंदन करते हुए श्री श्री रविशंकर ने उन्हें भारत माता का अमूल्य और श्रेष्ठ पुत्र बताया और कहा कि पीएम मोदी ने जीवन के हर पहलू को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की और कहा कि देश को उनकी श्रेष्ठता पर गर्व है।
समारोह को संबोधित करते हुए श्री श्री रविशंकर ने पिछले एक दशक में हुए परिवर्तनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को गंदगी, गरीबी और अव्यवस्था से निकालकर एक नई पहचान दी है, जिसमें ‘स्वच्छ भारत अभियान’ ने देश की सुंदरता और स्वच्छता के प्रति नजरिया बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।
उन्होंने विकास के मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने भारत को मांगने वाले देश की श्रेणी से निकालकर देने वाले देश के रूप में स्थापित किया है। आर्थिक मोर्चे पर विषम परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह से भारतीय अर्थव्यवस्था को संभाला गया, वह काबिले तारीफ है। श्री श्री ने सुरक्षा के भाव पर जोर देते हुए कहा कि आज देश हिंसा से मुक्त होकर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है और विदेशों में भारत को लेकर पुरानी धारणाएं अब बदल चुकी हैं।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए श्री श्री रविशंकर ने अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण को प्रधानमंत्री के कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कर्नाटक का काशी के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव साझा करते हुए कहा कि कर्नाटक के शिल्प और शिला से अयोध्या में रामलला विराजमान हुए हैं।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की भव्यता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को काशी भ्रमण की सलाह भी दी। प्रधानमंत्री की ‘विकासपुरुष’ वाली छवि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह नरेंद्र मोदी ने पहले गुजरात को चमकाया, आज वे पूरे भारत को नई आभा दे रहे हैं।
समारोह के अंत में श्री श्री रविशंकर ने योग, आयुर्वेद, कला और शिक्षा के क्षेत्र में हुए कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि योग को वैश्विक मंच पर योग दिवस के रूप में स्थापित करना और आयुर्वेद के लिए अलग मंत्रालय बनाना भारत की विरासत को सम्मान देने जैसा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपनापन देते हुए कहा कि अपनों को धन्यवाद नहीं दिया जाता क्योंकि धन्यवाद कहने से वे पराए हो जाते हैं। ‘मैं आपका हूं’ के संदेश के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री के दीर्घायु होने और निरंतर देश का नेतृत्व करने की कामना की।
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