AI नहीं सीख रहे कर्मचारी ज्यादा खतरे में, सर्वे में नौकरी जाने का जोखिम 3 गुना अधिक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह नौकरी और करियर की सुरक्षा से भी जुड़ता जा रहा है। एक हालिया गैलप सर्वे में सामने आया है कि जो कर्मचारी अपने काम में AI टूल्स का कम उपयोग करते हैं, उनमें नौकरी जाने या छंटनी का जोखिम अन्य कर्मचारियों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। सर्वे के अनुसार AI का उपयोग न करने वाले या बहुत कम उपयोग करने वाले कर्मचारियों में नौकरी गंवाने का खतरा करीब 18 प्रतिशत तक दर्ज किया गया।

सर्वे में यह भी पाया गया कि AI टूल्स का प्रभावी इस्तेमाल करने वाले कर्मचारी अधिक उत्पादक, तेज और बदलती कार्य आवश्यकताओं के अनुरूप माने जा रहे हैं। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो नई तकनीकों को अपनाने और अपने कार्यों में उन्हें शामिल करने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि कई संगठनों ने कर्मचारियों के लिए AI प्रशिक्षण और अपस्किलिंग कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI का बढ़ता प्रभाव पारंपरिक नौकरियों के स्वरूप को बदल रहा है। हालांकि AI पूरी तरह मानव श्रम का विकल्प नहीं बन रहा, लेकिन जो कर्मचारी तकनीक के साथ खुद को अपडेट नहीं कर रहे हैं, वे प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट सकते हैं। डेटा विश्लेषण, कंटेंट निर्माण, ग्राहक सेवा, मार्केटिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में AI आधारित टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट इस बात की ओर भी संकेत करती है कि आने वाले वर्षों में केवल डिग्री या अनुभव ही पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि तकनीकी अनुकूलन क्षमता भी नौकरी की सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों को AI को खतरे के रूप में नहीं, बल्कि अपनी उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने वाले उपकरण के रूप में देखना चाहिए। जो लोग समय रहते AI कौशल विकसित करेंगे, उनके लिए रोजगार के नए अवसर भी खुल सकते हैं।

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gaurav singh rajput

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