
Telegram पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी। हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक हित, राष्ट्रीय सुरक्षा और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा कि यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवेदनशील जानकारी, परीक्षा सामग्री या अन्य गोपनीय दस्तावेजों के प्रसार की आशंका हो, तो सरकार एहतियाती कदम उठा सकती है।
मामला उस फैसले से जुड़ा है जिसमें केंद्र सरकार ने NEET री-एग्जाम प्रक्रिया पूरी होने तक Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। सरकार का तर्क था कि परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री और प्रश्नपत्रों के लीक होने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाना आवश्यक था। अधिकारियों का कहना था कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए गलत सूचनाओं तथा परीक्षा सामग्री के प्रसार को रोकना परीक्षा की पारदर्शिता के लिए जरूरी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि Telegram पर प्रतिबंध लाखों वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित करता है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी असर डाल सकता है। हालांकि अदालत ने माना कि असाधारण परिस्थितियों में सरकार को सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देते हुए ऐसे निर्णय लेने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक फैसलों में न्यायिक हस्तक्षेप तभी उचित होगा जब निर्णय स्पष्ट रूप से मनमाना या कानून के विपरीत हो।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद Telegram पर लगी रोक फिलहाल प्रभावी रहेगी। माना जा रहा है कि NEET री-एग्जाम प्रक्रिया पूरी होने और सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा के बाद ही इस संबंध में आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, परीक्षा सुरक्षा और सरकारी अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
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