
भोपाल।आदि मिश्रा| मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सदन से पारित होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई। सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के अधिकारों, समानता और संवैधानिक मूल्यों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि कांग्रेस ने विधेयक को संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए इसका विरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर भाजपा के कई मंत्रियों और विधायकों ने विधेयक का समर्थन किया, वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री बोले- महिलाओं को मिलेंगे समान अधिकार, लिव-इन रिश्तों का भी होगा पंजीकरण
विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे मध्य प्रदेश के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने से महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार मिलेंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार, जनता से रायशुमारी के बाद एक महीने से भी कम समय में विधेयक तैयार किया गया। उन्होंने बताया कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए भी एक माह के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा तथा नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की परंपराओं और अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया गया है।
ऊषा ठाकुर ने विवाह पंजीकरण को बताया जरूरी
भाजपा विधायक ऊषा ठाकुर ने कहा कि उन्होंने सदन में यह विषय इसलिए उठाया क्योंकि उनके अनुसार समाज में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी यूसीसी लागू किया जाना आवश्यक है।
विश्वास सारंग और रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने विधानसभा में यूसीसी का विरोध कर अपना हिंदू विरोधी रुख दिखाया है। उन्होंने दावा किया कि यूसीसी लागू होने से कानून में एकरूपता आएगी और कुछ प्रथाओं पर रोक लगेगी।
वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यूसीसी संविधान और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की समानता की भावना के अनुरूप है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
अभिलाष पांडे, जगदीश देवड़ा और कृष्णा गौर ने फैसले का किया समर्थन
भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने जनता से किया गया वादा पूरा किया है। उनके अनुसार यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 और 44 की भावना के अनुरूप है।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने यूसीसी को प्रदेश सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि कांग्रेस को विरोध करना है तो करती रहे।
राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी संविधान में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रहित में यह कानून लागू किया जा रहा है।
आरिफ मसूद ने विधेयक का किया विरोध
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार पर आरोप लगाया कि विधेयक में उनके द्वारा दिए गए संशोधन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 29 की भावना के विपरीत है तथा इसकी कुछ धाराएं आपस में टकराव पैदा करती हैं। मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार ने सिविल मामलों को आपराधिक स्वरूप देने का प्रयास किया है और विधेयक को एकतरफा तरीके से पारित कराया गया।
रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार-विपक्ष आमने-सामने
विधानसभा सत्र के दौरान रोजगार के मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस हुई। कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री चेतन कश्यप ने कहा कि मोहन सरकार ने पिछले वर्ष को “रोजगार वर्ष” के रूप में मनाया था, जिसका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। साथ ही सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से भी युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों की पुष्टि किए आंकड़े पेश कर रहा है।
नोट: इस समाचार में विभिन्न नेताओं के बयान उनके आधिकारिक वक्तव्यों पर आधारित हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप संबंधित नेताओं के अपने-अपने दावे हैं।
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