
दिल्ली में टीबी को लेकर सामने आए नए आंकड़ों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक विशेष स्क्रीनिंग अभियान के दौरान 42 दिनों में 12,078 नए टीबी मरीजों की पहचान की गई। यह अभियान 24 मार्च से 5 मई के बीच चलाया गया था और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इसमें बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी सामने आए, जिनमें बीमारी के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं थे।
12 हजार से ज्यादा मरीजों की हुई पहचान
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार स्क्रीनिंग अभियान के दौरान मिले 12,078 मामलों में 10,755 वयस्क और 1,323 बच्चे शामिल हैं। यानी कुल मामलों में करीब 11 प्रतिशत मरीज बच्चे हैं। वहीं मरीजों में 6,360 पुरुष और 5,715 महिलाएं शामिल हैं। तीन मामले ट्रांसजेंडर लोगों में भी सामने आए।
इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि टीबी केवल फेफड़ों तक सीमित बीमारी नहीं है। सामने आए मामलों में करीब 42 प्रतिशत एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी के थे, यानी ऐसे मामले जिनमें संक्रमण फेफड़ों के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित करता है।
कौन से लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क?
टीबी के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार खांसी, खासकर दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बनी रहने वाली खांसी, टीबी का महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। इसके अलावा बुखार, रात में अधिक पसीना आना, वजन कम होना, भूख में कमी, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
कुछ मरीजों में खांसी के साथ बलगम या खून भी आ सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी में बदल सकते हैं लक्षण
टीबी जब फेफड़ों के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित करती है, तो इसके लक्षण प्रभावित अंग के अनुसार अलग हो सकते हैं। यही वजह है कि कई बार बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है।
गर्दन में बिना दर्द वाली गांठ, लंबे समय से बना रहने वाला कमर या हड्डियों का दर्द, पेशाब में खून या अन्य असामान्य लक्षण अलग-अलग प्रकार की एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
देश में टीबी के खिलाफ अभियान जारी
दिल्ली के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब देश में टीबी की जल्द पहचान और इलाज पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार 2015 से 2024 के बीच भारत में हर साल सामने आने वाले नए टीबी मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि इसी अवधि में टीबी से होने वाली मौतों में 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
सरकार के अनुसार टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 7 दिसंबर 2024 से 20 करोड़ से अधिक संवेदनशील आबादी की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 28 लाख से ज्यादा टीबी मरीजों की पहचान हुई है।
लक्षण दिखें तो जांच में देरी न करें
टीबी का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए बीमारी की समय पर पहचान और डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार को पूरा करना बेहद जरूरी है। लंबे समय से खांसी, लगातार बुखार, रात में पसीना, अचानक वजन कम होना या खून के साथ खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें सामान्य समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए।
दिल्ली में सामने आए 12,078 मामलों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान टीबी से बचाव की सबसे अहम कड़ी है।
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