
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए Foreign Trade Policy 2023 में अहम बदलाव किया है। Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने 20 अगस्त 2026 को नियमों में संशोधन करते हुए निर्यातकों के लिए रुपये में व्यापार करना आसान बनाया है।
रुपये में इनवॉइस और पेमेंट की सुविधा
नए नियमों के तहत भारतीय निर्यातक एशियन क्लियरिंग यूनियन (ACU) से बाहर के देशों के साथ निर्यात सौदों का इनवॉइस भारतीय रुपये या किसी विदेशी मुद्रा में कर सकेंगे। भुगतान भी रुपये या विदेशी मुद्रा में प्राप्त किया जा सकेगा।
सबसे अहम बदलाव यह है कि पात्र रुपये में प्राप्त निर्यात भुगतान को Foreign Trade Policy के तहत विदेशी मुद्रा में प्राप्त निर्यात आय के समान माना जाएगा। इससे निर्यातकों को सरकार की व्यापार नीति से जुड़े लाभ और निर्यात दायित्व पूरा करने में सुविधा मिलेगी।
निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
सरकार के इस कदम से भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये का इस्तेमाल करने का एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। इससे विदेशी मुद्रा में भुगतान के लिए होने वाले कुछ रूपांतरण खर्च और मुद्रा जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भारत रुपये को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ज्यादा स्वीकार्य बनाने की कोशिश कर रहा है। रुपये में निर्यात भुगतान को व्यापार नीति के लाभों के लिए मान्यता देने से भारतीय निर्यातकों के लिए स्थानीय मुद्रा में सौदे करने का प्रोत्साहन बढ़ सकता है।
डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की भूमिका अभी भी काफी बड़ी है। ऐसे में रुपये में व्यापार को बढ़ावा देना भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भारत और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच स्थानीय मुद्रा में लेनदेन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि, रुपये को वैश्विक व्यापार में बड़े स्तर पर स्थापित करने के लिए केवल नियमों में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। विदेशी व्यापार साझेदारों की स्वीकार्यता, रुपये की स्थिरता और सीमा पार भुगतान व्यवस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- dgft-foreign-trade-policy-rupee-global-trade-export-payment-2026








