
सार
यश की फिल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ को लेकर सेंसर बोर्ड में ग्राफिक हिंसा के इस्तेमाल पर नई बहस शुरू होने की रिपोर्ट सामने आई है। पूर्व बीजेपी नेता के. अन्नामलाई की हालिया टिप्पणियों के बाद CBFC के भीतर यह चर्चा होने की बात कही जा रही है कि फिल्मों में अत्यधिक हिंसा को किस सीमा तक प्रमाणित किया जाना चाहिए। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि ‘Toxic’ का मौजूदा A सर्टिफिकेट बदला या रद्द किया जा रहा है।
विस्तार
मुंबई। अभिनेता यश की चर्चित फिल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ की रिलीज के बीच फिल्मों में दिखाई जाने वाली ग्राफिक हिंसा को लेकर सेंसर बोर्ड के स्तर पर बहस तेज होने की खबर है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चर्चा सिर्फ ‘Toxic’ तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय फिल्मों में अत्यधिक हिंसा को प्रमाणित करने के लिए मौजूदा मानकों की समीक्षा से जुड़ी है।
फिल्म को गीतू मोहनदास ने निर्देशित किया है और इसमें यश मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, रुक्मिणी वसंत, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। यह क्राइम, गैंगस्टर, पारिवारिक संघर्ष और एक्शन के इर्द-गिर्द बनी फिल्म है।
रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म में बंदूक, खून-खराबे और शरीर के अंग काटे जाने जैसे हिंसक दृश्य होने की बात कही गई है। ऐसे में CBFC के भीतर कथित तौर पर यह सवाल चर्चा में है कि किसी फिल्म में दिखाई जाने वाली अत्यधिक हिंसा कहानी की जरूरत है या सिर्फ दर्शकों को झटका देने और प्रभाव पैदा करने के लिए इस्तेमाल की गई है।
अन्नामलाई के बयान के बाद चर्चा तेज
पूर्व बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने हाल में फिल्मों में अत्यधिक हिंसा और कथित महिला-विरोधी सामग्री को प्रमाणित किए जाने को लेकर CBFC पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सीधे तौर पर ‘Toxic’ का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनकी टिप्पणियां फिल्म को लेकर चल रही चर्चा के बीच सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद CBFC के भीतर ग्राफिक हिंसा के आकलन से जुड़े मानकों पर चर्चा शुरू हुई।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये चर्चाएं कथित तौर पर फिल्म के मौजूदा सर्टिफिकेट को दोबारा तय करने के बजाय भविष्य में अत्यधिक हिंसा वाले कंटेंट को किस तरह देखा जाए, इससे संबंधित हैं।
‘Marco’ भी फिर चर्चा में
इस बहस में 2024 की मलयालम एक्शन फिल्म ‘Marco’ का उदाहरण भी सामने आया है। फिल्म में अत्यधिक हिंसा के चित्रण को लेकर पहले विवाद हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, ‘Marco’ से जुड़ी चर्चा ने भी फिल्मों में ग्राफिक हिंसा के लिए अधिक स्पष्ट और परिभाषित दिशानिर्देशों की जरूरत का सवाल उठाया था।
इसी वजह से मौजूदा चर्चा को सिर्फ यश की ‘Toxic’ तक सीमित नहीं माना जा रहा। यदि CBFC के स्तर पर मानकों को लेकर आगे कोई बदलाव होता है, तो उसका असर भविष्य में अत्यधिक हिंसा वाले कंटेंट वाली कई फिल्मों के प्रमाणन पर पड़ सकता है।
‘Toxic’ को मिला है A सर्टिफिकेट
‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ को CBFC ने A सर्टिफिकेट दिया है। इसका मतलब है कि फिल्म को सिनेमाघरों में वयस्क दर्शक ही देख सकते हैं। फिल्म की हिंसक सामग्री को लेकर उठी बहस इसी प्रमाणन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हो गई है।
हालांकि, रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि CBFC की कथित आंतरिक चर्चा को इस बात की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए कि ‘Toxic’ का प्रमाणपत्र वापस लिया जा रहा है या उसमें बदलाव किया जा रहा है। CBFC से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगे जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है, लेकिन फिलहाल बोर्ड की ओर से कोई टिप्पणी उपलब्ध नहीं बताई गई।
फिल्म अपनी रिलीज के बाद भी दर्शकों और इंडस्ट्री के बीच चर्चा में बनी हुई है। एक ओर इसके बड़े स्तर के एक्शन और यश की भूमिका को लेकर चर्चा है, वहीं दूसरी ओर हिंसा के चित्रण को लेकर सेंसरशिप और कंटेंट की सीमाओं पर बहस शुरू हो गई है।
‘Toxic’ को लेकर मौजूदा विवाद सिर्फ एक फिल्म के सीन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके बहाने भारतीय सिनेमा में ग्राफिक हिंसा की स्वीकार्य सीमा, कहानी के लिए उसकी जरूरत और दर्शकों पर उसके प्रभाव को लेकर व्यापक सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल ‘Toxic’ का A सर्टिफिकेट कायम है और CBFC की ओर से प्रमाणपत्र बदलने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
यह भी पढ़े: Avengers: Doomsday: विक्टर कैसे बना Doctor Doom? नए प्रोमो में खुला राज
- yash-toxic-cbfc-graphic-violence-debate-k-annamalai-marco










