
भोपाल: मध्य प्रदेश में खसरे का संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है। राज्य के बालाघाट जिले में खसरा, मलेरिया और कुपोषण के जानलेवा संयुक्त प्रकोप के कारण 26 मासूम बच्चों की अकाल मौत हो गई है। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं, जहां पिछले पूरे वर्ष में खसरे के कुल 1,800 मरीज दर्ज किए गए थे, वहीं इस वर्ष शुरुआती आठ महीनों में ही संक्रमितों का आंकड़ा 1,450 के पार पहुंच चुका है। यदि संक्रमण की यही रफ्तार कायम रही, तो वर्ष के अंत तक राज्य में कुल मरीजों की संख्या 2,500 तक पहुंच सकती है।
प्रदेश भर में खसरे के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बालाघाट में जुलाई और अगस्त के बीच 40 से अधिक संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि, राज्य में सर्वाधिक 125 मामले भिंड जिले से सामने आए हैं। इसके अलावा शिवपुरी और ग्वालियर जिलों में भी लगभग 90-90 रोगी चिह्नित किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खसरे के सबसे अधिक मामले आमतौर पर गर्मी के मौसम में आते हैं, जिसके बाद सितंबर महीने से संक्रमण का दूसरा दौर शुरू होता है। हालांकि गर्मी के मुकाबले दूसरे दौर की तीव्रता थोड़ी कम रहती है। इस बीमारी के प्रति आम जनता को सतर्क और जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 16 मार्च को ‘राष्ट्रीय खसरा दिवस’ मनाया जाता है।
पूर्व राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला के अनुसार, खसरे के प्रसार में एक खास तरह का पैटर्न देखा जाता है। उन्होंने बताया कि आम की बौर (मंजर) आने के चक्र की तरह खसरे का संक्रमण भी हर चौथे वर्ष तेज होता है। हालांकि आम की बौर और खसरे का आपस में कोई सीधा वैज्ञानिक संबंध नहीं है, लेकिन दोनों का समय लगभग साथ-साथ चलता आ रहा है। इससे पहले वर्ष 2022 में खसरे के मामले अचानक बढ़े थे और अब ठीक चार साल बाद 2026 में भी यह रुझान दोहराया जा रहा है।
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