
रीवा/ अरविंद तिवारी: रीवा कलेक्ट्रेट के ठीक बगल में संचालित न्यू कॉफी हाउस का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में टेबल पर शराब की बोतलें और शराब से भरे गिलास दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद कॉफी हाउस के संचालन, लीज की शर्तों और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल के कार्यकाल में कॉफी हाउस संचालन के लिए लीज पर दी गई थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संचालक को परिसर में शराब परोसने की अनुमति है? यदि अनुमति नहीं है तो वायरल वीडियो में दिखाई दे रही शराब वहां तक कैसे पहुंची? फिलहाल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
कलेक्ट्रेट के बगल में कॉफी हाउस, वीडियो ने मचाई हलचल
रीवा कलेक्ट्रेट के ठीक बगल में संचालित न्यू कॉफी हाउस इन दिनों किसी कॉफी या खान-पान की वजह से नहीं, बल्कि एक कथित वायरल वीडियो के कारण चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक टेबल पर शराब की बोतलें और गिलास दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिसर के ठीक बगल में यदि इस तरह की गतिविधि हुई है तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक क्यों नहीं पहुंची?
हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियों और उसके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
लीज की शर्तों पर सबसे बड़ा सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा न्यू कॉफी हाउस को दी गई लीज से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल के कार्यकाल में कलेक्ट्रेट परिसर की भूमि कॉफी हाउस संचालन के लिए लीज पर दी गई थी।
ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि लीज एग्रीमेंट में कॉफी हाउस के संचालन को लेकर क्या-क्या शर्तें निर्धारित की गई थीं। क्या संचालक को केवल खान-पान की सुविधा संचालित करने की अनुमति दी गई थी या शराब परोसने की भी कोई वैध अनुमति मौजूद है?
यदि शराब परोसने की अनुमति लीज में शामिल नहीं है, तो वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली शराब की बोतलों की मौजूदगी गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं, यदि संचालक के पास आबकारी विभाग की कोई वैध अनुमति है तो उसके दस्तावेज और अनुमति की शर्तें सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट की जानी चाहिए।
अधिवक्ता और उनके दोस्तों से जुड़ा बताया जा रहा वीडियो
जानकारी के अनुसार अधिवक्ता बीके माला अपने कुछ मित्रों के साथ न्यू कॉफी हाउस पहुंचे थे। इसी दौरान वहां का कथित वीडियो मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड किया गया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।
वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें टेबल पर शराब की बोतलें और शराब से भरे गिलास नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो कब का है, उसमें मौजूद लोग कौन हैं और वहां शराब किस उद्देश्य से रखी गई थी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ऐसे में वीडियो की सत्यता, उसकी तारीख और उसमें दिखाई देने वाली गतिविधियों के संबंध में प्रशासन द्वारा जांच कराई जाना जरूरी माना जा रहा है।
प्रशासनिक निगरानी पर क्यों उठ रहे सवाल?
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि न्यू कॉफी हाउस कलेक्ट्रेट के ठीक बगल में संचालित बताया जा रहा है। कलेक्ट्रेट जिले का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है, जहां अलग-अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से मौजूद रहते हैं।
ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि कॉफी हाउस में वास्तव में शराब परोसी जा रही थी तो यह गतिविधि संबंधित विभागों की निगरानी से कैसे बची रही?
खास तौर पर आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि किसी प्रतिष्ठान में शराब परोसने की गतिविधि हो रही है तो उसके लिए निर्धारित लाइसेंस और नियमों का पालन जरूरी होता है। ऐसे में प्रशासन और आबकारी विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि न्यू कॉफी हाउस के पास शराब से संबंधित कोई वैध अनुमति या लाइसेंस है अथवा नहीं।
खाद्य और आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों में
कॉफी हाउस जैसे प्रतिष्ठान में खाद्य सुरक्षा और अन्य संबंधित नियमों के पालन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। वहीं शराब की बिक्री या परोसने से जुड़े मामलों में आबकारी विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
वायरल वीडियो के बाद अब यह जांच का विषय है कि कॉफी हाउस का संचालन किन शर्तों के तहत किया जा रहा है। क्या वहां नियमित निरीक्षण होता है? क्या संचालक के दस्तावेजों और लाइसेंस की जांच की गई है? क्या लीज की शर्तों के अनुरूप ही परिसर का इस्तेमाल किया जा रहा है?
इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
क्या लीज की शर्तों का पालन हो रहा है?
पूरे विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि सरकारी भूमि या प्रशासनिक परिसर से जुड़ी किसी संपत्ति को जिस उद्देश्य के लिए लीज पर दिया गया है, उसका उपयोग उसी उद्देश्य और निर्धारित शर्तों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।
यदि न्यू कॉफी हाउस को केवल भोजन और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जगह दी गई थी, तो शराब से संबंधित गतिविधि की शिकायत या वायरल वीडियो सामने आने के बाद लीज की शर्तों की समीक्षा की जानी चाहिए।
वहीं, यदि किसी प्रकार की शराब परोसने की वैध अनुमति मौजूद है तो प्रशासन और आबकारी विभाग को इसे स्पष्ट करना चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।
वायरल वीडियो की जांच जरूरी
सोशल मीडिया पर वायरल कोई भी वीडियो अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। वीडियो की तारीख, स्थान, उसकी वास्तविकता और संदर्भ की पुष्टि जांच के माध्यम से जरूरी होती है।
इस मामले में भी प्रशासन चाहे तो वीडियो की तकनीकी जांच के साथ मौके का निरीक्षण कर सकता है। इसके अलावा न्यू कॉफी हाउस के लीज दस्तावेज, आबकारी लाइसेंस और अन्य संबंधित अनुमति की जांच से तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
अब प्रशासन और आबकारी विभाग के सामने सवाल
वायरल वीडियो के बाद रीवा प्रशासन और आबकारी विभाग के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं-
- * क्या न्यू कॉफी हाउस के पास शराब परोसने की वैध अनुमति है?
- * लीज एग्रीमेंट में शराब से संबंधित क्या शर्तें निर्धारित हैं?
- * क्या कॉफी हाउस का संचालन लीज की शर्तों के मुताबिक हो रहा है?
- * क्या संबंधित विभाग ने इससे पहले प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया है?
- * वायरल वीडियो वास्तविक है या नहीं, इसकी जांच कब होगी?
- * यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आएगा।
कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
फिलहाल न्यू कॉफी हाउस का कथित वायरल वीडियो प्रशासनिक निगरानी को लेकर बहस का विषय बन गया है। एक तरफ वीडियो में शराब की बोतलें और गिलास दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पूरे मामले की वास्तविकता जांच का विषय है।
अब निगाहें रीवा प्रशासन, आबकारी और पुलिस विभाग पर हैं। यह देखना अहम होगा कि अधिकारी वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं।
अगर जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो कार्रवाई की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों की होगी। वहीं यदि वायरल वीडियो के दावे सही नहीं पाए जाते हैं तो प्रशासन को तथ्य स्पष्ट कर स्थिति साफ करनी होगी।
फिलहाल कलेक्ट्रेट की चौखट पर खड़े इन सवालों का जवाब जांच से ही मिलेगा—क्या न्यू कॉफी हाउस में वास्तव में नियमों के विपरीत शराब परोसी जा रही थी, या वायरल वीडियो ने किसी अलग घटना को लेकर भ्रम पैदा किया है?
ये भी पढ़े – सिंधिया ने खनियांधाना-बामौरकलां को दी करोड़ों की विकास सौगात, चार बड़े प्रोजेक्ट्स का किया लोकार्पण
- rewa-new-coffee-house-viral-video-alcohol-bottles-collectorate-monitoring








