
रीवा/ अरविंद तिवारी: रीवा में भारी बारिश और जलभराव के बाद नगर निगम और राजस्व विभाग ने नदी-नालों के किनारे हुए कथित अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। बीहर नदी के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में स्थित हमीदिया कॉलोनी में टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में एक फॉर्म हाउस के कथित अतिक्रमण वाले हिस्से को जेसीबी से ध्वस्त किया। कार्रवाई के दौरान स्थानीय रहवासियों ने विरोध जताते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि कई निर्माणों के लिए नगर निगम से नक्शे और अनुमति जारी हुई थी तथा उनके पास रजिस्ट्री, बिजली कनेक्शन और टैक्स की रसीदें भी मौजूद हैं। वहीं, लोगों ने नदी किनारे मौजूद अन्य निर्माणों पर भी समान कार्रवाई की मांग उठाई है।
बाढ़ और जलभराव के बाद प्रशासन का एक्शन
रीवा में हाल में हुई भारी बारिश और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति के बाद नदी-नालों और उनके आसपास हुए निर्माण को लेकर प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। खास तौर पर बीहर नदी के ग्रीन बेल्ट और संभावित बहाव क्षेत्र में मौजूद निर्माण अब जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।
इसी क्रम में नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम जेसीबी और पुलिस बल के साथ हमीदिया कॉलोनी पहुंची। टीम ने नदी किनारे किए गए निर्माण और अतिक्रमण का निरीक्षण करने के बाद एक फॉर्म हाउस के उस हिस्से को ध्वस्त किया, जिसे निगम की ओर से कथित तौर पर अतिक्रमण वाला हिस्सा बताया गया।
कार्रवाई के दौरान मौके पर काफी हलचल रही। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए अधिकारियों के सामने कई सवाल रखे।
फॉर्म हाउस के कथित अवैध हिस्से पर चला बुलडोजर
नगर निगम की टीम ने नदी किनारे बद्रिका मोटर के संचालक सुनील सिंह के फॉर्म हाउस पर कार्रवाई की। टीम के मुताबिक फॉर्म हाउस का एक हिस्सा नदी के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में अतिक्रमण की श्रेणी में आ रहा था।
इसके बाद जेसीबी की मदद से चिह्नित हिस्से को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि नदी और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, कार्रवाई के तरीके और चयन को लेकर स्थानीय लोगों के सवालों ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।
रहवासियों ने कहा- हमारे पास हैं दस्तावेज
हमीदिया कॉलोनी के कुछ रहवासियों ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जिन निर्माणों को अब अवैध बताया जा रहा है, उनमें से कई के संबंध में नगर निगम की ओर से नक्शे और अनुमति जारी की गई थी।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उनके पास जमीन की रजिस्ट्री के साथ नगर निगम की स्वीकृति, बिजली कनेक्शन और संपत्ति कर से संबंधित रसीदें मौजूद हैं। उनका सवाल है कि यदि निर्माण के समय संबंधित विभागों ने अनुमति दी थी और वर्षों से टैक्स लिया जा रहा है, तो अब अचानक इन्हें अवैध बताकर कार्रवाई क्यों की जा रही है?
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त पूर्व सूचना नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन के रिकॉर्ड में किसी निर्माण को नियम विरुद्ध पाया गया है तो पहले संबंधित दस्तावेजों की जांच कर स्पष्ट स्थिति बताई जानी चाहिए।
कार्रवाई के दायरे पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यह सवाल भी किया कि यदि उद्देश्य बीहर नदी के ग्रीन बेल्ट और बहाव क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराना है, तो कार्रवाई सभी संबंधित निर्माणों पर समान रूप से क्यों नहीं की जा रही?
लोगों का कहना है कि नदी किनारे केवल एक या कुछ निर्माणों पर कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। प्रशासन को पूरे क्षेत्र का सर्वे कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन से निर्माण ग्रीन बेल्ट, नदी के बहाव क्षेत्र या अन्य प्रतिबंधित क्षेत्र में आते हैं।
स्थानीय रहवासियों के मुताबिक यदि वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो सभी मामलों में समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इससे कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर भी विराम लग सकता है।
विधायक और रिवर फ्रंट का मुद्दा भी उठा
कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह से जुड़े कथित अतिक्रमण और रिवर फ्रंट निर्माण का मुद्दा भी उठाया। लोगों ने मांग की कि यदि नदी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो कार्रवाई का दायरा सभी संबंधित निर्माणों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह मामला प्रशासन की जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को किसी व्यक्ति या निर्माण विशेष को केंद्र में रखने के बजाय नदी के पूरे ग्रीन बेल्ट और बहाव क्षेत्र का सर्वे कराना चाहिए। इसके बाद नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अनुमति देने वाले विभागों की जिम्मेदारी पर सवाल
हमीदिया कॉलोनी की कार्रवाई के बाद सबसे अहम सवाल नगर निगम की भूमिका को लेकर भी खड़ा हो गया है। अगर किसी निर्माण के लिए पहले नगर निगम से नक्शा या अनुमति जारी हुई थी और बाद में वही निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि निर्माण के समय संबंधित दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई थी? क्या अनुमति जारी करने से पहले नदी के ग्रीन बेल्ट और बहाव क्षेत्र की सीमा का परीक्षण किया गया था? अगर नियमों के मुताबिक निर्माण प्रतिबंधित था तो अनुमति कैसे जारी हुई?
वहीं, यदि संबंधित निर्माण ने स्वीकृत नक्शे या अनुमति की शर्तों का उल्लंघन किया है तो प्रशासन की कार्रवाई का आधार क्या है और क्या इस संबंध में संबंधित पक्ष को पहले नोटिस दिया गया था-इन सवालों के जवाब भी सामने आना बाकी हैं।
बाढ़ के बाद नदी क्षेत्रों पर बढ़ी नजर
रीवा में भारी बारिश के बाद जलभराव और जल निकासी को लेकर सामने आई परेशानियों ने नदी-नालों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे में प्रशासन अब नदी किनारे होने वाले निर्माणों की ओर ध्यान दे रहा है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की ओर से अक्सर यह सवाल उठाया जाता रहा है कि प्राकृतिक जल निकासी वाले क्षेत्रों में निर्माण होने से बारिश के दौरान पानी के बहाव पर असर पड़ सकता है। हालांकि, किसी विशेष निर्माण को बाढ़ या जलभराव के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले तकनीकी जांच जरूरी है।
हमीदिया कॉलोनी में हुई कार्रवाई को भी इसी व्यापक अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रशासन का कहना- कार्रवाई जारी रहेगी
नगर निगम का कहना है कि नदी और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। प्रशासन की प्राथमिकता नदी के बहाव क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट को अतिक्रमण से मुक्त कराना बताई जा रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में प्रशासन हमीदिया कॉलोनी और बीहर नदी के आसपास मौजूद अन्य निर्माणों का सर्वे करता है या नहीं। साथ ही, स्थानीय लोगों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे नक्शे, रजिस्ट्री, बिजली कनेक्शन और टैक्स संबंधी दस्तावेजों की जांच किस तरह की जाती है।
फिलहाल एक ओर प्रशासन नदी और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय रहवासी कार्रवाई में समानता और पुराने स्वीकृत दस्तावेजों की जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे में इस पूरे मामले का वास्तविक समाधान कार्रवाई के साथ-साथ दस्तावेजों की पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय होने से ही संभव होगा।
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