
सार
आज फ्रिज भारतीय घरों की आम जरूरत है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब देश में रेफ्रिजरेटर विदेशों से आयात किए जाते थे और बेहद महंगे होते थे। 1 जुलाई 1958 को गोदरेज ने भारत का पहला स्वदेशी रेफ्रिजरेटर बाजार में उतारा। उस समय ताले बनाने के लिए मशहूर कंपनी ने ऐसी तकनीक और डिजाइन पर काम किया, जो भारतीय मौसम और जरूरतों के मुताबिक थी।
विस्तार
कभी सिर्फ अमीरों के घरों तक सीमित था फ्रिज
आज शहर से लेकर गांव तक लगभग हर वर्ग के घर में फ्रिज आसानी से मिल जाता है। लेकिन भारत में इसकी शुरुआत इतनी आसान नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रेफ्रिजरेटर का आयात 1928 से शुरू हो गया था। उस दौर में विदेशी फ्रिज बेहद महंगे थे और मुख्य रूप से बड़े अधिकारियों, अमीर व्यापारियों और राजनेताओं के घरों तक ही सीमित रहते थे।
आजादी के बाद देश में स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर जोर बढ़ा। इसी दौर में गोदरेज ने भारत में ही घरेलू रेफ्रिजरेटर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
1 जुलाई 1958 को लॉन्च हुआ पहला देसी फ्रिज
गोदरेज ने 1 जुलाई 1958 को भारत का पहला स्वदेशी यानी स्थानीय स्तर पर निर्मित रेफ्रिजरेटर बाजार में उतारा। यह उस समय एक बड़ी औद्योगिक उपलब्धि मानी गई, क्योंकि इससे महंगे आयातित फ्रिज के विकल्प के तौर पर भारतीय उत्पाद सामने आया।
पहले मॉडल में स्टेनलेस स्टील की शेल्फ लगाई गई थीं। इसकी मजबूती और टिकाऊपन पर खास ध्यान दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौर में खरीदे गए कुछ फ्रिज 50 साल से भी ज्यादा समय तक चलते रहे।
आधा फ्रीजर और ऑटोमैटिक टेम्परेचर कंट्रोल
गोदरेज के पहले रेफ्रिजरेटर में उस समय के हिसाब से कई खास सुविधाएं दी गई थीं। इसमें आधा फ्रीजर, ऑटोमैटिक टेम्परेचर कंट्रोल और सफेद इनेमल केसिंग दी गई थी।
अंदर चीनी मिट्टी के इंटीरियर का इस्तेमाल किया गया था, जिससे इसकी सफाई आसान हो सके। इस मॉडल को ‘मॉडल 9’ के नाम से जाना गया। इसके पीछे नौरोजी पिरोजशा गोदरेज के विजन का भी उल्लेख किया गया है।
भारतीय गर्मी को ध्यान में रखकर बनाया गया
उस समय भारत में फ्रिज बनाना सिर्फ विदेशी मशीन की नकल करना नहीं था। इसे भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से तैयार करने की जरूरत थी।
गोदरेज की सोच थी कि ऐसा फ्रिज बनाया जाए जो देश की गर्म जलवायु में भी प्रभावी ढंग से काम कर सके। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजाइन के पीछे भारत की तेज गर्मी को ध्यान में रखा गया था, जहां गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
ताले से शुरू हुआ सफर, फ्रिज तक पहुंचा
दिलचस्प बात यह है कि रेफ्रिजरेटर बनाने से पहले गोदरेज की पहचान ताले बनाने वाली कंपनी के तौर पर थी।
गोदरेज एंड बॉयस की स्थापना 1897 में अर्देशिर गोदरेज और उनके भाई पिरोजशा बुर्जोरजी गोदरेज ने की थी। कंपनी ने शुरुआती दौर में स्प्रिंगलेस ताले और आग व चोरी से बचाने वाली तिजोरियां विकसित की थीं।
यानी जिस कंपनी की पहचान कभी ताले और तिजोरियों से थी, उसी ने आगे चलकर भारतीय घरेलू उपकरण बाजार में भी अपनी जगह बनाई।
महंगी लग्जरी को जरूरत बनाने की कोशिश
1958 में स्वदेशी फ्रिज लॉन्च करने के पीछे सिर्फ कारोबार बढ़ाना मकसद नहीं था। कंपनी की सोच भारत को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता घटाने और फ्रिज जैसी महंगी वस्तु को आम भारतीय परिवारों तक पहुंचाने की थी।
आज जब फ्रिज भारतीय घरों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है, तब करीब सात दशक पुरानी यह कहानी बताती है कि देश में घरेलू उपकरणों का बाजार किस तरह धीरे-धीरे विकसित हुआ।
- Godrej-Launched-India-First-Indigenous-Refrigerator-In-1958








