
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सफाई कर्मचारियों की तीन दिन से जारी हड़ताल खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ शुक्रवार रात हुई बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। शनिवार सुबह से सफाई और घरों से कचरा उठाने का काम फिर शुरू हो गया है। हालांकि, शहर की सड़कों और बाजारों में जमा करीब 2,550 टन कचरे को हटाना नगर निगम के सामने बड़ी चुनौती है।
मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद बनी सहमति
सफाई कर्मचारी वेतन बढ़ाने, नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा खत्म करने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। कर्मचारियों की प्रमुख मांग 25 दिन काम करने वाले कर्मियों का वेतन 10,500 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करना था।
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के साथ बैठक में मांगों पर चर्चा हुई। सरकार ने 25 दिन काम करने वाले कर्मचारियों का मासिक वेतन 18 हजार से 20 हजार रुपये तक करने की बात कही है। वहीं, 29 दिन काम करने वाले और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिया गया है।
इस प्रक्रिया के लिए कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए कमेटी बनाई जाएगी। इसे एक महीने में प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी देने की बात कही गई है। अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों पर भी कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
तीन दिन में जमा हुआ 2550 टन कचरा
हड़ताल के कारण भोपाल के 85 वार्डों और 21 जोन में सफाई व्यवस्था प्रभावित रही। घरों से कचरा उठाने वाली 400 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी रहीं। शहर में सामान्य दिनों में रोजाना करीब 800 से 850 टन कचरा निकलता है। ऐसे में तीन दिन की हड़ताल के दौरान लगभग 2,550 टन कचरा जमा हो गया।
न्यू मार्केट, चार इमली, कोलार रोड, बुधवारा बाजार और मंत्रालय-विधानसभा क्षेत्र के आसपास भी कचरे के ढेर दिखाई दिए। कई जगह डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़कों तक फैल गया। कुछ स्थानों पर लोगों ने कचरे में आग भी लगा दी, जिससे धुएं और प्रदूषण की समस्या बढ़ी।
हड़ताल के दौरान पानी के टैंकरों की आपूर्ति भी कुछ इलाकों में प्रभावित हुई। इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सफाई अभियान शुरू, सामान्य व्यवस्था बहाल करना चुनौती
हड़ताल समाप्त होने के बाद शनिवार सुबह सफाई कर्मचारी काम पर लौटे। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, महापौर मालती राय और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार भी सफाई अभियान में शामिल हुए। शुरुआत 10 नंबर मार्केट से की गई।
प्रशासन के सामने अब जमा कचरे को जल्द हटाने और नियमित डोर-टू-डोर कलेक्शन व्यवस्था बहाल करने की चुनौती है। शहर में कचरे की मात्रा अधिक होने के कारण सफाई अभियान को तेज करना होगा।
भोपाल के साथ शिवपुरी, विदिशा और प्रदेश के अन्य शहरों में भी हड़ताल का असर देखने को मिला था। अब कर्मचारियों के काम पर लौटने से राहत की उम्मीद है। हालांकि, सरकार ने जिन मांगों पर सहमति और आश्वासन दिया है, उन पर तय समय में अमल करना भी जरूरी होगा।
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