
सार
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध तेज हो गया है। पुणे और छत्रपति संभाजीनगर समेत कई जगहों पर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। अब इस आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली CJP ने छात्रों के साथ आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया है।
विस्तार
ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक से शुरू हुआ विवाद
MPSC विवाद की सबसे बड़ी वजह मार्च में हुई ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-B स्क्रीनिंग परीक्षा का कथित पेपर लीक मामला है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंच गया था।
इस मामले में MPSC के अंडर-सेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे और दो असिस्टेंट सेक्शन अधिकारियों समेत सात लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। गिरफ्तार लोगों में एक महिला अभ्यर्थी भी शामिल बताई गई है।
इस घटना के बाद अभ्यर्थियों ने आयोग की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि अगर परीक्षा कराने वाली व्यवस्था से जुड़े अधिकारी ही कथित तौर पर पेपर लीक मामले में जांच के दायरे में आते हैं, तो पूरी प्रक्रिया पर भरोसा कैसे किया जाए।
उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पर भी सवाल
विवाद सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 और कृषि सेवा परीक्षा की वर्णनात्मक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं के कारण योग्य उम्मीदवारों के परिणाम प्रभावित हुए। इसी वजह से छात्र पूरे भर्ती तंत्र की स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
चार प्रमुख मांगों पर अड़े अभ्यर्थी
MPSC अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार और सचिव के तत्काल इस्तीफे की मांग शामिल है। छात्रों का कहना है कि आयोग में ऐसे अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जिनकी कार्यप्रणाली पर कोई सवाल न हो।
इसके अलावा छात्र चाहते हैं कि ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
अभ्यर्थियों ने गिरफ्तार अंडर-सेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल के दौरान आयोजित सभी परीक्षाओं का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी रखी है। साथ ही 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित ग्रुप-C की लिपिक एवं टंकलेखक प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की गई है।
पुणे से संभाजीनगर तक प्रदर्शन
मामले को लेकर महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर चुके हैं। पुणे और छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन के बाद आंदोलन का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। नागपुर में भी अभ्यर्थियों ने MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
छत्रपति संभाजीनगर और लातूर में भी आंदोलन को समर्थन मिला है। NCP विधायक रोहित पवार पहले ही अभ्यर्थियों के मुद्दे को लेकर सक्रिय रहे हैं।
अब CJP भी आंदोलन में उतरेगी
छत्रपति संभाजीनगर के वालुज में MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद अभिजीत दिपके ने आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। उनकी पार्टी CJP ने कहा है कि वह अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन में शामिल होगी।
CJP ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे के लिए 24 सितंबर 2026 तक की समयसीमा रखी है। दिपके ने कहा है कि अगर तय समय तक कार्रवाई नहीं होती है तो पार्टी राज्यभर में MPSC कोचिंग सेंटरों और जिलों का दौरा कर आंदोलन को आगे बढ़ाएगी।
सरकार ने भी उठाए हैं परीक्षा व्यवस्था सुधारने के कदम
पेपर लीक विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात कह रही है। पेपर लीक रोकने के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय टास्क फोर्स ने प्रश्नपत्र परीक्षा के ठीक पहले तैयार करने जैसी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र की छपाई, परिवहन और वितरण के दौरान होने वाली संभावित लीक की गुंजाइश को कम करना है।
अब MPSC अभ्यर्थियों की नजर इस बात पर है कि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर क्या फैसला लेती है। फिलहाल पेपर लीक और मूल्यांकन को लेकर उठे सवालों ने महाराष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में से एक की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बहस तेज कर दी है।
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