
मैहर जिले के रामनगर-अमरपाटन क्षेत्र में पिछले नौ दिनों से जंगली हाथी का मूवमेंट जारी है। बुधवार तड़के गोरसरी गांव में हाथी ने पिंटू कोल के घर को नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
नौ दिन से गांवों के आसपास हाथी का मूवमेंट
मैहर जिले के रामनगर और अमरपाटन क्षेत्र में जंगली हाथी की मौजूदगी को नौ दिन बीत चुके हैं। बताया जा रहा है कि हाथी लगातार जंगल और आबादी वाले क्षेत्रों के बीच घूम रहा है। इस दौरान ग्रामीणों में लगातार डर बना हुआ है।
बुधवार को ब्रह्ममुहूर्त के समय गोरसरी गांव में हाथी ने पिंटू कोल के घर को गिरा दिया। घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हाथी के लगातार आबादी की ओर आने से ग्रामीण अपने घरों और फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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घर गिरने के बाद वन विभाग की रणनीति पर सवाल
गोरसरी में घर को नुकसान पहुंचाने की घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की निगरानी और हाथी को आबादी से दूर रखने की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी की लोकेशन लगातार सामने आने के बावजूद उसका गांवों तक पहुंचना चिंता का विषय है।
ग्रामीणों की मांग है कि हाथी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और संवेदनशील गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जनहानि का खतरा भी पैदा हो सकता है।
इंसान और हाथी दोनों की सुरक्षा की चुनौती
जंगली हाथी के लगातार मूवमेंट के बीच सबसे बड़ी चुनौती इंसानों और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को हाथी के रास्ते, उसके ठहरने वाले क्षेत्रों और आबादी में प्रवेश के संभावित स्थानों की पहचान कर प्रभावी रणनीति बनानी चाहिए।
बताया गया है कि यह हाथी बाणसागर जलाशय क्षेत्र से निकलकर रामनगर क्षेत्र की ओर पहुंचा है और पिछले कई दिनों से इलाके में सक्रिय है। ऐसे में ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथी के करीब नहीं जाने की जरूरत है। वन विभाग की ओर से हाथी की निगरानी और उसे सुरक्षित तरीके से जंगल क्षेत्र की ओर ले जाने के प्रयास महत्वपूर्ण होंगे।
रामनगर-अमरपाटन क्षेत्र में नौ दिनों से जारी जंगली हाथी की गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गोरसरी में घर गिराए जाने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब चुनौती यह है कि वन विभाग हाथी के मूवमेंट पर प्रभावी निगरानी रखते हुए ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और वन्यजीव को भी सुरक्षित रखा जाए।
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