
उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को समझने की अपील की। उन्होंने भारतीय परंपरा और मुगलकालीन इतिहास को लेकर अपनी टिप्पणी भी की।
उज्जैन| मध्य प्रदेश के उज्जैन में चल रही तीन दिवसीय युवा धर्म संसद में गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने युवाओं को भारतीय संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने धर्म, संस्कृति और भारतीय परंपराओं को लेकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में देशभर से आए युवा प्रतिनिधि, विद्वान और अन्य वक्ता भी शामिल हुए।
मनोज मुंतशिर ने भारतीय परंपरा का किया जिक्र
युवा धर्म संसद में अपने संबोधन के दौरान मनोज मुंतशिर ने भारतीय संस्कृति की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां भगवान राम की खड़ाऊं तक की पूजा की जाती है। उन्होंने इसके जरिए भारतीय परंपरा में त्याग, सम्मान और आदर्शों के महत्व की बात रखी।
उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति को समझने और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने की अपील की। उनके मुताबिक नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए गीता और रामायण जैसे ग्रंथों को पढ़ना चाहिए।
मुंतशिर ने भारतीय संस्कृति को लेकर अपने विचार रखते हुए कहा कि युवाओं को केवल आधुनिक प्रभावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी परंपराओं और इतिहास को भी समझना जरूरी है।
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बाबर की परंपरा पर टिप्पणी से चर्चा
अपने संबोधन में मनोज मुंतशिर ने भारतीय परंपरा की तुलना बाबर से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा के संदर्भ से की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा खड़ाऊं पूजने वाली है, जबकि बाबर की परंपरा भाइयों के सिर काटने वाली थी। यह टिप्पणी उनके संबोधन का हिस्सा थी और इसी वजह से उनका बयान चर्चा में आया है।
उन्होंने अपने भाषण में युवाओं को भारतीय संस्कृति और इतिहास को नए नजरिए से समझने की बात कही। कार्यक्रम में धर्म और संस्कृति के साथ युवाओं की भूमिका, चरित्र निर्माण और समकालीन विषयों पर भी चर्चा हुई।
युवा धर्म संसद में जुटे देशभर के युवा
उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद 17 से 19 सितंबर तक चल रही है। आयोजकों के अनुसार इसमें देशभर से 1,600 से अधिक युवा प्रतिनिधि और 24 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के कलाकार पहुंचे हैं। कार्यक्रम का आयोजन सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से किया गया है।
कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज और अन्य वक्ताओं ने भी युवाओं से संवाद किया। दूसरे दिन मोहन भागवत ने धर्म और रिलिजन के बीच अंतर पर बात रखते हुए धर्म को जीवन को दिशा देने वाली अवधारणा के रूप में समझाया।
युवा धर्म संसद में भारतीय संस्कृति, धर्म, चरित्र निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना जैसे समकालीन विषयों पर भी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
उज्जैन की युवा धर्म संसद में मनोज मुंतशिर ने भारतीय संस्कृति, धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं से युवाओं को जोड़ने की बात कही। उनके संबोधन में बाबर की परंपरा को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी। तीन दिवसीय आयोजन का समापन 19 सितंबर को होना है।
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