
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग के ECINet सॉफ्टवेयर को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे हटाने की मांग की है। यह विवाद गोवा के 97 मतदाताओं के नाम से जुड़ा है, जिन्हें स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने योग्य पाया था, लेकिन कथित तौर पर सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव न हो पाने के कारण उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।
गोवा के 97 मतदाताओं से जुड़ा मामला
ECINet को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद सामने आया जिसमें गोवा के 97 मतदाताओं का मामला उठाया गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन मतदाताओं के मामलों की सुनवाई स्थानीय Electoral Registration Officers ने की थी और उन्हें मतदाता सूची में शामिल करने योग्य पाया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले इन नामों को हटाने की प्रक्रिया दर्ज हो चुकी थी। बाद में स्थानीय अधिकारियों ने इन्हें दोबारा शामिल करने की जरूरत बताई, लेकिन ECINet में ऐसा करने के लिए जरूरी ‘rollback’ सुविधा उपलब्ध नहीं थी। कथित तौर पर इस प्रक्रिया की अनुमति दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के आईटी तंत्र के नियंत्रण में थी।
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से इस संबंध में चुनाव आयोग को कई बार संपर्क किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सात दिनों में आठ ईमेल भेजे गए थे, जिनमें आवश्यक बदलाव की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
अंतिम सूची में भी नहीं जुड़े नाम
रिपोर्ट के मुताबिक, 21 फरवरी को गोवा की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हुई। इसके बाद 97 नामों की जांच की गई और रिपोर्ट में दावा किया गया कि सितंबर तक ये सभी नाम अंतिम सूची में दिखाई नहीं दिए थे।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण बताया गया क्योंकि गोवा में मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड का इस्तेमाल कुछ सरकारी योजनाओं की पात्रता तय करने में भी होता है। रिपोर्ट के अनुसार, गोवा मेडिक्लेम योजना के तहत कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा राज्य के मतदाताओं के लिए उपलब्ध है। इनमें डायलिसिस, एंजियोप्लास्टी, ट्रांसप्लांट और कैंसर उपचार जैसी सेवाएं शामिल हैं।
थरूर ने चुनाव आयोग से क्या कहा?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मामले को गंभीर बताया। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रभावित नागरिकों के लिए जवाबदेही तय करने और ECINet सॉफ्टवेयर को वापस लेने की मांग की।
थरूर ने आरोप लगाया कि इस तरह की तकनीकी व्यवस्था से नागरिकों के संवैधानिक अधिकार और जरूरी सरकारी सुविधाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रभावित लोगों से माफी मांगने की भी मांग की।
ECINet को लेकर पहले भी उठे सवाल
ECINet को चुनाव आयोग ने इस साल जनवरी में लॉन्च किया था। इससे पहले इसका बीटा संस्करण बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नवंबर 2025 में टेस्ट किया गया था। यह प्लेटफॉर्म आम लोगों को चुनाव से संबंधित रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ चुनाव अधिकारियों के लिए भी इस्तेमाल होता है।
हाल के दिनों में ECINet और ERONet के केंद्रीकृत संचालन को लेकर भी चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने डिजिटल चुनावी डेटाबेस और स्थानीय अधिकारियों की पहुंच से जुड़े मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों से जुड़ी रिपोर्टों पर कहा है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय, टिप्पणियां और सुझाव प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि चुनावी पुनरीक्षण से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
फिलहाल ECINet को लेकर विवाद का केंद्र यह सवाल है कि स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किसी मतदाता को पात्र पाए जाने के बाद तकनीकी प्रणाली में उस फैसले को लागू करने की प्रक्रिया कितनी स्वतंत्र और प्रभावी है। गोवा के 97 मतदाताओं का मामला इसी बहस को सामने लेकर आया है।
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