
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 साल पुराने ब्लाइंड मर्डर केस में फरार चल रहे आरोपी फिरोज उर्फ ख्वाजा को गुरुग्राम के मानेसर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, वह आईएमटी मानेसर की रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में पिछले करीब दो साल से दर्जी का काम कर रहा था। आरोपी पर 2002 में कलाम अंसारी की हत्या करने का आरोप है।
दिल्ली के एक पुराने ब्लाइंड मर्डर केस की फाइल 24 साल बाद फिर खुली और पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 2002 के हत्या मामले में फरार चल रहे फिरोज उर्फ ख्वाजा को गुरुग्राम के आईएमटी मानेसर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने लंबे समय तक अपनी पहचान और ठिकाना छिपाए रखा और मानेसर में एक रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में दर्जी के तौर पर काम कर रहा था।
तुगलकाबाद के जंगल में मिला था सड़ा-गला शव
मामला 18 फरवरी 2002 का है। दिल्ली के तुगलकाबाद किले के पास डीडीए के जंगल में एक करीब 35 वर्षीय व्यक्ति का सड़ा-गला शव बरामद हुआ था। जांच के बाद मृतक की पहचान बिहार के पश्चिमी चंपारण निवासी कलाम अंसारी के रूप में हुई।
कलाम वर्ष 2001 में रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था। पुलिस के मुताबिक, वह फिरोज के साथ ही दिल्ली आया था और दोनों एक-दूसरे को जानते थे। बाद में दोनों के बीच विवाद और रंजिश हो गई थी।
भाई की मौत को लेकर था शक
पुलिस जांच के अनुसार, फिरोज के भाई साहबजान की शादी कलाम के गांव में हुई थी। पारिवारिक विवाद के बाद साहबजान की पत्नी उसके साथ रहने के लिए तैयार नहीं थी। इसी विवाद के बीच साहबजान ने कलाम के घर के सामने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस का कहना है कि फिरोज को शक था कि उसके भाई की मौत के लिए कलाम का परिवार जिम्मेदार है। इसी रंजिश के चलते उसने कलाम से बदला लेने की ठान ली थी। हालांकि, इस मामले में सामने आए ये तथ्य पुलिस जांच और उसके अनुसार दर्ज घटनाक्रम पर आधारित हैं।
बहाने से जंगल ले गया, फिर हत्या का आरोप
पुलिस के मुताबिक, 15 फरवरी 2002 को फिरोज कलाम अंसारी को बहाने से तुगलकाबाद के जंगल की ओर ले गया। वहां उसने कथित तौर पर पत्थरों से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी।
18 फरवरी को जब कलाम का शव बरामद हुआ तो पुलिस ने ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद फिरोज बिहार लौट गया और कलाम के बारे में परिजनों को गलत जानकारी देता रहा। हत्या का मामला सामने आने के बाद वह फरार हो गया।
30 जगहों पर छापेमारी के बाद मिला सुराग
लंबे समय तक आरोपी का पता नहीं चलने के बाद केस को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने के साथ तकनीकी सर्विलांस और फील्ड इनपुट के जरिए आरोपी की तलाश शुरू की।
पुलिस टीम ने करीब दो महीने तक आरोपी के संभावित ठिकानों और उसके पुराने संपर्कों की जानकारी जुटाई। इस दौरान बिहार में करीब 30 स्थानों पर छापेमारी की गई। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को पता चला कि फिरोज गुरुग्राम के मानेसर में रह रहा है।
मानेसर की फैक्ट्री में दर्जी बनकर रह रहा था
पुलिस के मुताबिक, आरोपी आईएमटी मानेसर की एक रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में पिछले करीब दो साल से दर्जी का काम कर रहा था। टीम ने पहले उसकी पहचान और गतिविधियों की पुष्टि की और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अब 48 साल के हो चुके फिरोज ने हत्या के बाद अपने पैतृक गांव से संपर्क काफी हद तक तोड़ लिया था। वह अलग-अलग जगहों पर रहकर अपनी पहचान छिपाता रहा और अंततः गुरुग्राम पहुंचा। वह शादीशुदा है और उसके चार बच्चे हैं।
24 साल बाद खुला पुराना केस
इस गिरफ्तारी के साथ दिल्ली पुलिस को 2002 से लंबित इस हत्या मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि फरारी के दौरान आरोपी किन-किन जगहों पर रहा और उसने अपनी पहचान कैसे छिपाए रखी।
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