
झांसी/ राजकुमार शर्मा: विश्व रेबीज दिवस पर झांसी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें बताया गया कि जनवरी से 31 अगस्त तक जिले में 46,292 डॉग बाइट के मामले सामने आए। अधिकारियों ने लोगों से जानवर के काटने या खरोंचने के बाद घाव को तुरंत धोने और बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लेकर एंटी रेबीज टीका लगवाने की अपील की।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता गोष्ठी आयोजित
विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी डॉ. शिशिर पुरी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में अधिकारियों और चिकित्सकों ने रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव, टीकाकरण और कुत्ते के काटने के बाद किए जाने वाले तत्काल उपचार के बारे में जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिशिर पुरी ने कहा कि रेबीज जानलेवा बीमारी जरूर है, लेकिन इससे बचाव पूरी तरह संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने को हल्के में न लें और समय पर टीकाकरण कराएं।
उन्होंने बताया कि रेबीज वायरस से होने वाली घातक बीमारी है। यह मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा हो सकती है। ज्यादातर मामलों में संक्रमण कुत्ते के काटने या खरोंचने से होता है। इसके अलावा बिल्ली, बंदर और अन्य जंगली जानवर भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
जानवर काटे तो सबसे पहले घाव धोएं
नोडल अधिकारी डॉ. रमाकांत स्वर्णकार ने बताया कि यदि कोई जानवर काट ले तो सबसे पहले घाव को साबुन और साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। घाव को खुला रखना चाहिए और खुद से टांके या बैंडेज नहीं लगाना चाहिए। इसके बाद जल्द से जल्द नजदीकी चिकित्सक से संपर्क कर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रेबीज टीका लगवाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि घाव की गंभीरता के आधार पर उपचार तय किया जाता है। प्रथम श्रेणी में यदि केवल त्वचा पर जानवर की लार लगती है या उसे छूने-प्यार करने जैसी स्थिति होती है तो आमतौर पर टीके की जरूरत नहीं होती।
चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण
द्वितीय श्रेणी में दांत या नाखून से खरोंच आने, त्वचा पर लालिमा या हल्का रक्तस्राव होने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण किया जाता है। त्वचा में लगाए जाने वाले टीके के लिए सामान्य तौर पर 0, 3, 7 और 28वें दिन डोज दिए जाते हैं, जबकि मांसपेशी में लगाए जाने वाले टीके के पांच डोज 0, 3, 7, 14 और 28वें दिन दिए जाते हैं।
तृतीय श्रेणी के घाव में टीकाकरण के साथ इम्यूनोग्लोबुलिन भी चिकित्सकीय जांच और मरीज के वजन के आधार पर घाव के आसपास लगाया जाता है।
झांसी में 46 हजार से ज्यादा डॉग बाइट केस
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद झांसी में जनवरी से 31 अगस्त तक कुल 46,292 डॉग बाइट के मामले सामने आए। इनमें 12,075 मामले पालतू कुत्तों और 29,671 मामले आवारा कुत्तों के काटने से संबंधित बताए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि पालतू कुत्तों को लेकर भी लापरवाही न बरतें और काटे जाने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
डॉ. रमाकांत स्वर्णकार ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को पहले एंटी रेबीज टीका लग चुका है और उसे दोबारा जानवर काट लेता है तो उपचार की प्रक्रिया अलग हो सकती है। ऐसे व्यक्ति को पूर्व में लगाए गए टीके का रिकॉर्ड, स्लिप या डॉक्टर की पर्ची सुरक्षित रखनी चाहिए, ताकि चिकित्सक उसके आधार पर आगे का उपचार तय कर सके।
लक्षण दिखाई देने के बाद बीमारी बेहद खतरनाक
अधिकारियों ने बताया कि रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद बीमारी बेहद गंभीर हो जाती है। पानी, रोशनी और हवा से डर लगना, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए लक्षणों का इंतजार करने के बजाय जानवर के काटने के बाद ही बचाव के कदम उठाना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को आवारा जानवरों से अनावश्यक दूरी बनाए रखने की सलाह दी। खासकर बच्चों को आवारा कुत्तों के पास अकेले नहीं जाने देना चाहिए। पालतू कुत्तों को भी नियमित रूप से एंटी रेबीज टीका लगवाना चाहिए और उनकी निगरानी रखनी चाहिए।
यदि किसी पालतू जानवर को अज्ञात या आवारा जानवर काट ले तो उसे तत्काल पशु चिकित्सालय ले जाकर उपचार और टीकाकरण कराना चाहिए। घर के आसपास खुले में कूड़ा-कचरा या बचा हुआ खाना फेंकने से भी बचने की सलाह दी गई, ताकि आवारा जानवर आबादी वाले क्षेत्रों में आकर्षित न हों।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीकाकरण
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सरकारी चिकित्सालयों में एंटी रेबीज के टीके निःशुल्क उपलब्ध हैं। गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं के लिए भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ये टीके सुरक्षित हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर एआरवी और एआरएस की उपलब्धता लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
गोष्ठी में डॉ. अंशुमन तिवारी, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष अग्निहोत्री, निजी चिकित्सालयों के चिकित्सक, जिला मलेरिया अधिकारी आरके त्रिपाठी, डॉ. अनुराधा राजपूत, एपिडिमियोलॉजिस्ट और जिला सर्विलांस यूनिट के सदस्य मौजूद रहे।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को यह भी संदेश दिया कि जानवर पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें बेवजह छेड़ने या परेशान करने से बचना चाहिए। साथ ही, किसी जानवर के काटने को लेकर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय उपचार लेना ही सुरक्षित तरीका है।
- jhansi-46292-dog-bite-cases-rabies-awareness-health-department








