
एक महत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ कमिश्नर साहब ने अपने कामकाज को लेकर एक स्पष्ट व्यवस्था बना रखी है। साहब ने अपने अधीनस्थों और विभाग से जुड़े लोगों को साफ संदेश दिया है कि किसी आधिकारिक काम के सिलसिले में उनसे कार्यालयीन समय में ही संपर्क किया जाए। बताया जाता है कि कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद साहब आधिकारिक फोन कॉल रिसीव नहीं करते और मोबाइल पर भेजे गए व्हाट्सएप संदेशों का जवाब भी नहीं देते।
इतना ही नहीं, अवकाश के दिनों को लेकर भी उनकी व्यवस्था स्पष्ट है। छुट्टी के दिन किसी आधिकारिक काम के सिलसिले में फोन या संदेश करने से बचने को कहा गया है। साहब का मानना है कि कार्यालयीन काम के लिए एक निर्धारित समय होना चाहिए और उसके बाद व्यक्तिगत समय को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए। इसी व्यवस्था के तहत कार्यालयीन समय में ही आधिकारिक काम को लेकर संपर्क करने की बात कही गई है।
साहब की इस व्यवस्था से कुछ लोग हैरान हैं तो कुछ इसे काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। फिलहाल विभाग में कमिश्नर साहब का यह संदेश बिल्कुल साफ है—ऑफिस का काम ऑफिस टाइम में ही। आधिकारिक काम के लिए निर्धारित समय में संपर्क करने और छुट्टी के दिनों में आधिकारिक फोन या संदेश से बचने की व्यवस्था को लेकर कमिश्नर साहब का संदेश विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है
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