
प्रदेश के एक छोटे से आदिवासी बहुल जिले में पदस्थ एसपी साहब की कार्यशैली अपने कई साथी कप्तानों से अलग बताई जा रही है। प्रदेश के कुछ जिलों में जहां एसपी के सप्ताह में कुछ ही दिन कार्यालय पहुंचने और बाकी समय बंगले से बने शिविर कार्यालय के जरिए कामकाज संचालित करने की बातें सामने आती रहती हैं, वहीं इस जिले के एसपी साहब का तरीका बिल्कुल अलग बताया जाता है। साहब सप्ताह के सातों दिन कार्यालय पहुंचते हैं और नियमित रूप से कामकाज की निगरानी करते हैं।
खास बात यह भी है कि वे केवल अपनी जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अधीनस्थ पुलिस कर्मचारियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखते हैं। बताया जाता है कि पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर जिले के अलग-अलग थानों में समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जाते हैं। साहब की कार्यशैली को लेकर यह भी बताया जा रहा है कि वे सप्ताह के सातों दिन कार्यालय पहुंचकर कामकाज की निगरानी करते हैं और अधीनस्थ कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी सजग रहते हैं।
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये साहब सीधी भर्ती वाले नहीं, बल्कि प्रमोटी आईपीएस हैं। शायद यही वजह है कि उनकी कार्यशैली को लेकर विभाग में अलग तरह की चर्चा बनी हुई है। आदिवासी बहुल जिले में पदस्थ एसपी साहब का नियमित रूप से कार्यालय पहुंचना और पुलिस कर्मचारियों की सुविधाओं तथा स्वास्थ्य पर ध्यान देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बताया जा रहा है।
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