
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को एक बार फिर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव को लेकर भाजपा ने स्पीकर अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने स्पीकर को हटाने की मांग दोहराई। हंगामा बढ़ने के बाद भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
संवैधानिक वैधता और प्रक्रिया को लेकर सवाल
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा ने एक बार फिर स्पीकर अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ आवाज उठाई। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने ऐसे प्रस्ताव को सदन में आगे बढ़ने दिया, जिसकी संवैधानिक वैधता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे।
सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा ने पहले ही स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव दिया है और उन्हें नैतिक आधार पर अपने पद से हट जाना चाहिए। भाजपा का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने के पक्ष में है, लेकिन राज्यhood प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और 2024 में विशेष दर्जे को लेकर पारित प्रस्तावों के संदर्भ पर उसे आपत्ति है।
विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी
भाजपा की आपत्तियों के बीच सदन में माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने भाजपा सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी है और सदन की कार्यवाही नियमों के मुताबिक ही चलेगी।
स्पीकर ने भाजपा विधायक आरएस पठानिया का भी उल्लेख करते हुए कहा कि स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव के लिए विधानसभा के नियमों में निर्धारित प्रक्रिया है। उन्होंने नियम 215 का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद उसे 14 दिन के बाद किसी दिन कार्यसूची में शामिल किया जा सकता है। यानी भाजपा की ओर से प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद उसे तत्काल सदन में मतदान के लिए नहीं लाया जा सकता।
संवैधानिक प्रावधानों का पालन
भाजपा विधायकों का तर्क है कि जब तक स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें सदन की अध्यक्षता नहीं करनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा लगातार स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी कर रही है। पार्टी का आरोप है कि राज्यhood प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में विधानसभा के नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
दरअसल, सोमवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश उस प्रस्ताव को पारित किया था, जिसमें केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और शीघ्र बहाल करने की मांग की गई। प्रस्ताव को लेकर भाजपा विधायकों ने सदन में जमकर विरोध किया था और बाद में वॉकआउट भी किया था।
प्रस्ताव की भाषा और उसमें शामिल संदर्भ स्वीकार्य नहीं
भाजपा ने प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और 2024 के विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्ताव के संदर्भ पर विशेष आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि वह पूर्ण राज्यhood की बहाली का समर्थन करती है, लेकिन प्रस्ताव की भाषा और उसमें शामिल संदर्भ स्वीकार्य नहीं हैं।
वहीं, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भाजपा के विरोध पर पलटवार करते हुए कहा कि विधानसभा चर्चा के लिए है, न कि नारेबाजी के लिए। उन्होंने भाजपा से सदन में शांतिपूर्वक अपनी बात रखने को कहा। सत्ता पक्ष का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की लंबे समय से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग रही है और विधानसभा ने उसी भावना को प्रस्ताव के जरिए सामने रखा है।
राज्यhood प्रस्ताव और स्पीकर को हटाने की मांग
हंगामा लगातार जारी रहने के बाद स्पीकर ने प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू करने की कोशिश की। इसके विरोध में भाजपा विधायक सदन से बाहर निकल गए। इस तरह मंगलवार को भी जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही राज्यhood प्रस्ताव और स्पीकर को हटाने की मांग के बीच राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बनी रही।
सोमवार और मंगलवार की घटनाओं से साफ है कि जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्यhood की मांग पर सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच मतभेद फिलहाल गहराए हुए हैं। एक तरफ सरकार इसे राज्य के अधिकार और जनता की आकांक्षा से जोड़ रही है, वहीं भाजपा प्रस्ताव की भाषा, उसमें किए गए पुराने संदर्भों और इसे सदन में लाने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।
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