
नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026। दिल्ली में पानी की बढ़ती जरूरत और किल्लत से निपटने के लिए करीब 100 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाने की योजना पर काम किया जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड इस परियोजना को लेकर IIT रुड़की के साथ अध्ययन और योजना तैयार कर रहा है। प्रस्तावित पाइपलाइन हरियाणा के मुनक से दिल्ली के हैदरपुर तक कच्चा पानी पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
मुनक से हैदरपुर तक बनेगी नई जल लाइन
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित पाइपलाइन मौजूदा नहर व्यवस्था के विकल्प के तौर पर काम कर सकती है। करीब 100 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए मैकेनिकल पंपिंग स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य कच्चे पानी को अधिक भरोसेमंद तरीके से दिल्ली तक पहुंचाना है।
दिल्ली की जल व्यवस्था लंबे समय से कच्चे पानी की उपलब्धता और वितरण से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। इस साल भी यमुना में पानी का स्तर कम होने के कारण वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ था। जून में दोनों संयंत्रों से सामान्य लक्ष्य की तुलना में कम पानी का उत्पादन दर्ज किया गया था।
यह भी पढ़े: भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या, दो दिन पहले रखा नौकर गायब
IIT रुड़की करेगा पानी की जरूरत का आकलन
नई पाइपलाइन परियोजना के साथ दिल्ली की भविष्य की जल जरूरत का आकलन भी किया जा रहा है। IIT रुड़की को यह अध्ययन करने के लिए कहा गया है कि मौजूदा आबादी और आने वाले वर्षों की जरूरतों के हिसाब से दिल्ली को कितने पानी की आवश्यकता होगी। यह अध्ययन यमुना के पानी के भविष्य के बंटवारे से भी जुड़ा है।
1994 में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था। अब पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके नए सिरे से आकलन की जरूरत बताई जा रही है।
दिल्ली की जल व्यवस्था में सुधार की जरूरत
दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर मार्च 2026 में पेश CAG की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में भी जल आपूर्ति और वितरण व्यवस्था से जुड़ी कई कमियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में कच्चे पानी की व्यवस्था, जल शोधन और वितरण प्रणाली में सुधार की जरूरत बताई गई थी।
नई पाइपलाइन परियोजना आगे बढ़ती है तो इसका उद्देश्य केवल मौजूदा जल संकट से निपटना ही नहीं, बल्कि दिल्ली की भविष्य की पानी की जरूरत के लिए अतिरिक्त और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करना भी होगा। हालांकि, परियोजना की अंतिम लागत, निर्माण की समयसीमा और इसे कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
यह भी पढ़े: UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में MP की 4 धरोहरें, भारत की सूची में 78 स्थल
- delhi-water-crisis-100-km-pipeline-plan








