
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए लंबे इंतजार के बाद मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी किया गया है। करीब 21 साल बाद सामने आए इस नए प्लान में अगले दो दशकों के भोपाल की तस्वीर तैयार करने की कोशिश की गई है। योजना का उद्देश्य केवल नई कॉलोनियां बसाना और सड़कों का विस्तार करना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, बेहतर परिवहन, रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और नागरिक सुविधाओं को साथ लेकर विकास का रोडमैप तैयार करना है। प्रस्तावित योजना का क्षेत्रफल 10116.90 वर्ग किलोमीटर रखा गया है, जिसमें 254 गांव शामिल हैं और करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर विकास प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।
नए मास्टर प्लान में भोपाल की प्राकृतिक पहचान को विकास की योजना के केंद्र में रखने की बात कही गई है। झील, पहाड़, हरियाली, जंगल और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को संरक्षित करने के लिए हरित क्षेत्र का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है। हरित क्षेत्र को करीब 16 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 27 प्रतिशत करने की बात कही गई है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र के प्रावधान को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। निजी हरित क्षेत्र में आने वाली जमीन के मालिकों के लिए ग्रीन टीडीआर जैसी व्यवस्था प्रस्तावित है। योजना में 31 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की कल्पना भी की गई है, जिसके आसपास आवास, कारोबार, रोजगार, IT, AI, लॉजिस्टिक्स, होटल, अस्पताल, शिक्षा और हाउसिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।
ड्राफ्ट में मिश्रित भूमि उपयोग को भी महत्व दिया गया है। उद्देश्य यह है कि घर और काम के बीच दूरी कम हो तथा रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। भोपाल के आसपास के गांवों और कस्बों को भी व्यापक विकास व्यवस्था में शामिल करने की योजना है। भोपाल की नियोजन सीमा 10116.90 वर्ग किलोमीटर और विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल 61017.02 हेक्टेयर बताया गया है। ड्राफ्ट पर एक महीने तक दावे-आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं और इसके बाद आपत्तियों के निराकरण के साथ अंतिम मास्टर प्लान लागू किया जाएगा।
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