
केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड अब तक एक अहम दस्तावेज रहा है, लेकिन आने वाले समय में इस व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भुगतान करने के लिए आधार कार्ड की जगह बायोमेट्रिक पहचान और वोटर आईडी (EPIC) नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है। मंत्री के इस बयान के बाद सरकारी योजनाओं के भुगतान की प्रक्रिया में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नई व्यवस्था किन योजनाओं में लागू होगी और इसे कब से शुरू किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 30 अक्टूबर को पंचायती राज मंत्रालय की ओर से आयोजित नेशनल वर्कशॉप, पीपुल्स प्लान कैंपेन 2026-27 में यह बात कही थी। कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब लाभार्थियों को भुगतान करने का आधार आधार कार्ड नहीं रहेगा। उन्होंने आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधार कार्ड बनाने वाली संस्थाएं अब हर जगह उपलब्ध हैं और किसी का भी आधार कार्ड कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सकता है। मंत्री के मुताबिक, लाभार्थियों के भुगतान के लिए उनकी बायोमेट्रिक पहचान और वोटर आईडी का EPIC नंबर आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
केंद्र सरकार की कई योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और बैंक खातों में भुगतान के लिए आधार का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan), प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) और ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम VB-G RAM G शामिल हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन में भी आधार से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल होता है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की कुछ योजनाओं में भी आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने पर इन योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। फिलहाल मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन योजनाओं में आधार की जगह EPIC नंबर और बायोमेट्रिक पहचान का इस्तेमाल किया जाएगा। नई व्यवस्था की लागू होने की तारीख और पूरी प्रक्रिया को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए लाभार्थियों को अभी अपनी संबंधित योजनाओं के मौजूदा नियमों के अनुसार ही दस्तावेज और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
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