
भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के अध्यक्ष पद को लेकर नया विवाद सामने आया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी अनिरुद्ध मुखर्जी पर करीब पांच महीने तक कथित तौर पर बिना वैधानिक नियुक्ति के अध्यक्ष पद का प्रभार संभालने के आरोप लगाए गए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर FIR दर्ज कराने, लोकायुक्त जांच और विभागीय कार्रवाई की मांग की है। आरोपों के सामने आने के बाद MPPCB में नियुक्ति प्रक्रिया और इस दौरान लिए गए प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर IAS अनिरुद्ध मुखर्जी पर उठे सवाल
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 17 जून 2026 को IAS अनिरुद्ध मुखर्जी को अपर मुख्य सचिव (पर्यावरण), पर्यावरण आयुक्त और EPCO के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। हालांकि, इस आदेश में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद का उल्लेख नहीं किया गया था।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 6 जुलाई 2026 को अनिरुद्ध मुखर्जी ने स्वयं को MPPCB का अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था। बताया गया है कि निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं होने के आधार पर इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद मुखर्जी के अध्यक्ष के रूप में काम करते रहने का दावा किया गया है।
इस पूरे मामले में नियुक्ति आदेश, संबंधित सरकारी दस्तावेजों और वास्तविक कार्यभार की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
पांच महीने के फैसलों की वैधानिक जांच कराने की मांग
अजय दुबे ने अपने ज्ञापन में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 4(2) का हवाला दिया है। उनका कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।
ज्ञापन के मुताबिक, नियुक्ति के लिए सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी और राजपत्र अधिसूचना जैसी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना जरूरी है।
पर्यावरण कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित पांच महीने के कार्यकाल के दौरान औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरणीय अनुमतियां देने के अलावा अधिकारियों की पदोन्नति और तबादलों से जुड़े फैसले भी लिए गए।
उन्होंने मांग की है कि इस अवधि में जारी किए गए सभी आदेशों, स्वीकृतियों और प्रशासनिक निर्णयों की वैधानिक समीक्षा कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित फैसले नियमों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।
IAS अनिरुद्ध मुखर्जी के खिलाफ FIR और निलंबन की मांग
पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, कैबिनेट सचिव और मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर कई मांगें उठाई हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- IAS अनिरुद्ध मुखर्जी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग।
- मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग।
- संबंधित अधिकारी के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की मांग।
- कथित पांच महीने के कार्यकाल में लिए गए फैसलों की समीक्षा।
- औद्योगिक इकाइयों को दी गई पर्यावरणीय अनुमतियों की जांच।
- कथित वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक निर्णयों की लोकायुक्त से जांच।
अजय दुबे का कहना है कि यदि नियुक्ति निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के बिना हुई है, तो उस अवधि में लिए गए फैसलों की भी जांच की जानी चाहिए।
MPPCB में नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल, आगे की कार्रवाई पर नजर
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद को लेकर उठे इस मामले में फिलहाल ज्ञापन के जरिए लगाए गए आरोप और कार्रवाई की मांग सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर IAS अनिरुद्ध मुखर्जी के खिलाफ FIR दर्ज होने, गिरफ्तारी या जांच के अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।
अब इस मामले में संबंधित सरकारी विभागों और जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही नियुक्ति से जुड़े आदेशों, बोर्ड के कार्यभार संबंधी दस्तावेजों और कथित पांच महीने के कार्यकाल में लिए गए फैसलों की आधिकारिक जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल MPPCB अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के बीच सभी की नजर सरकार के अगले कदम और संभावित जांच कार्रवाई पर टिकी है।
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