MP Tender Scam: अनुभव और टर्नओवर क्लॉज के नाम पर छोटे व्यापारियों का गला घोंटा?

एमपी में ‘टेंडर सेटिंग’ का खेल: छोटे व्यापारियों की बलि चढ़ाकर रसूखदारों की तिजोरियां भरने का बड़ा खुलासा!

सब-हेडलाइन: नियमों की आड़ में MSME का गला घोंट रहे भ्रष्ट अधिकारी और नेता; ‘अनुभव’ और ‘टर्नओवर’ के ऐसे क्लॉज जिससे बाहर हो रहे हैं प्रदेश के अपने उद्यमी।

भोपाल। मध्य प्रदेश को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने का सपना दिखाने वाले सिस्टम के भीतर एक ऐसा दीमक लगा है, जो प्रदेश के छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर को पनपने से पहले ही खत्म कर रहा है। सरकारी टेंडरों में ‘बड़े खेल’ के चक्कर में अधिकारी और सफेदपोश नेता मिलकर ऐसी बिसात बिछा रहे हैं, जिससे प्रदेश का छोटा व्यापारी मुख्यधारा से बाहर हो जाए और सारा मलाईदार काम उनके चहेते बड़े घरानों और ‘खास’ लोगों की झोली में चला जाए।

कैसे बुना जाता है ‘अपात्रता’ का जाल?

जब भी कोई नया टेंडर निकलता है, तो पर्दे के पीछे बैठे ‘सिंडिकेट’ के इशारे पर उसमें ऐसी शर्तें (Clauses) जोड़ दी जाती हैं, जिन्हें पूरा करना एक मध्यम या छोटे स्तर के व्यापारी के लिए नामुमकिन होता है।

  • टर्नओवर की ऊँची दीवार: जानबूझकर टेंडर की राशि से कई गुना ज्यादा टर्नओवर की शर्त रखी जाती है।
  • अनुभव का पेच: ऐसे विशिष्ट अनुभव मांगे जाते हैं जो केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों के पास ही हों।
  • नेगेटिव क्लॉज: MSME को मिलने वाली छूटों को कागजों तक सीमित कर दिया जाता है और तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) के नाम पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ते छोटे उद्यमी

इस भ्रष्टाचार के पीछे का असली कारण है—बड़ा कमीशन और बड़ी महत्वाकांक्षा। छोटे व्यापारी पारदर्शिता की मांग करते हैं, जबकि बड़ी कंपनियां और ठेकेदार सिस्टम को ‘मैनेज’ करने में माहिर होते हैं। नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर की शर्तें ही इस तरह डिजाइन की जाती हैं कि प्रतियोगिता (Competition) खत्म हो जाए और केवल एक या दो ‘पसंदीदा’ लोग ही पात्र बचें।

“यह सिर्फ व्यापार का नुकसान नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के टैलेंट की हत्या है। जब प्रदेश का अपना नया स्टार्टअप या कंपनी आगे नहीं बढ़ पाएगी, तो ‘मेक इन एमपी’ का नारा सिर्फ एक खोखला जुमला बनकर रह जाएगा।”

क्या होगा इसका अंजाम?

अगर यही स्थिति रही तो मध्य प्रदेश का मध्यम वर्ग और छोटे उद्यमी पूरी तरह कर्ज के जाल में फंस जाएंगे। रोजगार के अवसर कम होंगे और प्रदेश का पैसा बाहर की बड़ी कंपनियों की जेब में चला जाएगा। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को टेंडर प्रक्रियाओं की ऑडिटिंग करानी चाहिए और MSME के लिए बने नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए।

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