
सार
3 सितंबर 2026, गुरुवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज कृत्तिका नक्षत्र और व्याघात योग रहेगा। गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा और बृहस्पतिवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। आज अभिजीत मुहूर्त सुबह करीब 11:55 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक रहेगा, जबकि राहुकाल दोपहर करीब 1:55 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। आज का दिशाशूल दक्षिण दिशा में माना गया है।
विस्तार
हिंदू पंचांग के अनुसार 3 सितंबर 2026 को गुरुवार है और भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। सप्तमी तिथि 4 सितंबर की तड़के करीब 2:25 बजे तक रहने के बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। आज कृत्तिका नक्षत्र और व्याघात योग का संयोग रहेगा। पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 चल रहा है।
गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर पीली वस्तुओं, चने की दाल, गुड़ और तुलसी आदि का प्रयोग या दान करते हैं। बृहस्पतिवार व्रत रखने वाले श्रद्धालु श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की आराधना कर सकते हैं।
आज सूर्योदय करीब सुबह 6 बजे और सूर्यास्त करीब शाम 6:40 बजे होगा। चंद्रमा सुबह करीब 7:25 बजे तक मेष राशि में रहेगा, इसके बाद वृषभ राशि में प्रवेश करेगा।
शुभ समय की बात करें तो आज अभिजीत मुहूर्त सुबह करीब 11:55 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक रहेगा। इसे शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है। वहीं दिन में राहुकाल दोपहर करीब 1:55 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा। इस अवधि में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नए शुभ कार्य या महत्वपूर्ण शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आज दक्षिण दिशा का दिशाशूल माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा आवश्यक हो तो परंपरागत रूप से कुछ उपाय करने की सलाह दी जाती है।
पंचांग की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है, इसलिए किसी विशेष शहर में पूजा, यात्रा या शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
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