
सार
आगरा में गणेश चतुर्थी के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। कमला नगर-बल्केश्वर के गणेश चौक में इस बार 25 फीट ऊंची और करीब 6.7 टन वजनी गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। कोलकाता और नासिक के कारीगरों ने करीब दो महीने की मेहनत से इस प्रतिमा को तैयार किया है। यहां 11 दिनों तक गणेश महोत्सव चलेगा और रोजाना तीन बार आरती होगी।
विस्तार
19वें गणेश महोत्सव में विराजे भव्य गणपति
आगरा में सोमवार से गणपति बप्पा के जयकारों के साथ गणेशोत्सव शुरू हो गया। शहर के अलग-अलग हिस्सों में घरों, प्रतिष्ठानों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। लेकिन इस बार कमला नगर-बल्केश्वर स्थित गणेश चौक का पंडाल खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
यहां पोला भाई ग्रुप की ओर से आयोजित 19वें गणेश महोत्सव में 25 फीट ऊंची और करीब 6.7 टन वजन वाली गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। विशाल आकार की इस प्रतिमा को देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।
दो महीने में तैयार हुई प्रतिमा
आयोजक पोला भाई के मुताबिक, इस विशाल गणेश प्रतिमा को तैयार करने में कोलकाता और नासिक के कारीगरों ने करीब दो महीने तक मेहनत की। प्रतिमा की ऊंचाई और वजन के कारण इसकी स्थापना भी सामान्य प्रतिमाओं की तुलना में खास रही।
गणेशोत्सव के दौरान पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजकों ने धार्मिक आयोजन को लेकर विशेष तैयारियां की हैं।
11 दिन तक चलेगा गणेश महोत्सव
कमला नगर के इस पंडाल में गणेश महोत्सव 11 दिनों तक चलेगा। इस दौरान हर दिन तीन बार भगवान गणेश की आरती की जाएगी। पूजा-अर्चना के लिए फूल, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली और चंदन के साथ मोदक का भोग लगाया जाएगा।
गणेश पूजा में दुर्वा अर्पित करने की परंपरा है। वहीं, धार्मिक विधान के अनुसार भगवान गणेश को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता। 21 मोदक का भोग और ‘ॐ श्री गं गणपतये नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करने का भी महत्व बताया गया है।
शुभ मुहूर्त में हुई गणपति स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना के लिए सुबह 10:59 बजे से दोपहर 1:27 बजे तक का समय शुभ बताया गया था। ज्योतिषाचार्य के अनुसार भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है, इसलिए इसी अवधि में गणेश स्थापना और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में भगवान गणेश की बैठी हुई मुद्रा की प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है। वहीं, दुकान या कार्यालय में खड़ी मुद्रा वाली मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा बताई गई है। घर में बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति की स्थापना को भी शुभ माना जाता है।
चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर भी धार्मिक मान्यता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सोमवार को सुबह 8:55 बजे से रात 8:08 बजे तक चंद्रमा के दर्शन से बचने की मान्यता रही। धार्मिक विश्वास के अनुसार इस अवधि में चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक का दोष लग सकता है।
कमला नगर के गणपति पंडाल में इस बार विशाल प्रतिमा के साथ 11 दिनों तक चलने वाला आयोजन आगरा के गणेशोत्सव को खास बना रहा है। 25 फीट ऊंचे गणपति और भव्य पंडाल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
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