
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने बुधवार सुबह सभी आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। करीब तीन महीने से जेल में बंद आरोपियों में कई की जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपियों के लिए डिफॉल्ट बेल का विकल्प खत्म हो गया है।
अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने जांच के बाद अब अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। बुधवार, 23 सितंबर 2026 की सुबह पुलिस ने मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। इसके साथ ही मामले की जांच का यह चरण पूरा हो गया है।
पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिलने की संभावना समाप्त हो गई है। इस मामले में कई आरोपियों की जमानत अर्जियां पहले ही अदालत से खारिज हो चुकी हैं।
कई आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जेल में बंद अनुकल्प मिश्र, करुणेश पांडेय और लवकुश मिश्र की जमानत अर्जी मंगलवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा की अदालत ने खारिज कर दी थी।
इससे एक दिन पहले सोमवार को इसी मामले में अविनाश शुक्ल, रमाशंकर मिश्र और मनीष यादव की जमानत अर्जियां भी खारिज कर दी गई थीं। वहीं रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाषचंद्र श्रीवास्तव की जमानत अर्जियों पर बुधवार को सुनवाई होनी थी।
आठ आरोपियों पर दर्ज हुआ था मामला
राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस ने जून में आठ लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की थी। इसके बाद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने मामले से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की पड़ताल की थी।
पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया है। करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब आगे क्या होगा?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। अदालत अब आरोप पत्र और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं जिन आरोपियों की जमानत अर्जियां निचली अदालत से खारिज हो चुकी हैं, उनके लिए उच्च न्यायालय में जमानत की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुला है।
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। चार्जशीट दाखिल होना आरोपों का न्यायिक रूप से साबित होना नहीं है; मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के निर्णय से ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।
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