
उत्तर प्रदेश के बलिया में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत के मामले का कारण सामने आ गया है। जांच में पता चला कि सरसों के तेल में गलती से सत्यानाशी के बीज से निकला जहरीला तेल मिल गया था। इस तेल के सेवन से परिवार के सदस्यों में एपिडेमिक ड्रॉप्सी बीमारी के लक्षण विकसित हुए। उपचार के दौरान परिवार की तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि बचे सदस्यों की हालत में सुधार बताया गया है।
बलिया के बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र के पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने लोगों को हैरान कर दिया था। शुरुआती दौर में बीमारी की वजह स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। बाद में परिवार के बीमार सदस्यों को गोरखपुर स्थित एम्स में भर्ती कराया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने एपिडेमिक ड्रॉप्सी की पुष्टि की और इसके पीछे सत्यानाशी के बीज से निकले तेल को कारण माना।
दर्द के इलाज के लिए लाए थे सत्यानाशी के बीज
जानकारी के मुताबिक परिवार के मुखिया शिवचंद राजभर कर्नाटक के बेल्लारी में काम करते हैं। उन्हें घुटनों में दर्द की समस्या थी। वहां लोगों की सलाह पर उन्होंने दर्द से राहत के लिए मालिश करने के उद्देश्य से करीब आठ किलो सत्यानाशी के बीज खरीदे थे।
मई के अंतिम सप्ताह में इन बीजों से तेल निकलवाया गया। इसी दौरान घर में इस्तेमाल होने वाले सरसों के तेल को भी निकाला गया। बताया गया कि दोनों तेल आपस में मिल गए और परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी।
तेल के सेवन से बिगड़ने लगी तबीयत
शिवचंद काम के सिलसिले में वापस बेल्लारी चले गए। इसके बाद घर में मौजूद परिवार के सदस्य उसी तेल का इस्तेमाल खाना बनाने में करते रहे। कुछ समय बाद परिवार के लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी।
परिवार की 45 वर्षीय आशा देवी, 80 वर्षीय जोनिया देवी और बेटी प्रीति की हालत लगातार खराब होती गई। इलाज के बावजूद आशा देवी की 29 अगस्त को मौत हो गई। इसके बाद जोनिया देवी और प्रीति की भी जान चली गई। अलग-अलग रिपोर्टों में प्रीति की उम्र 20 से 24 वर्ष बताई गई है।
शिवचंद के भी उसी तेल से बनी सब्जियां खाने की जानकारी सामने आई है। वह भी बीमार पड़े, लेकिन उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार बताया गया है। उनके बेटे मनन का भी इलाज कराया गया।
एम्स गोरखपुर की जांच में खुला बीमारी का राज
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिवार और गांव में जांच की। बाद में तेल का नमूना भी जांच के लिए भेजा गया। गोरखपुर एम्स में डॉक्टरों ने मरीजों के लक्षणों के आधार पर ड्रॉप्सी की आशंका जताई।
जांच के बाद एपिडेमिक ड्रॉप्सी की पुष्टि हुई। डॉक्टरों के मुताबिक सत्यानाशी के बीजों में सेंगुइनेरिन नाम का जहरीला अल्कलाइड पाया जाता है। अगर इसके बीज सरसों में मिल जाएं और उनसे तेल निकाला जाए तो तेल जहरीला हो सकता है।
क्या है एपिडेमिक ड्रॉप्सी?
सत्यानाशी से दूषित तेल के सेवन से होने वाली एपिडेमिक ड्रॉप्सी में शरीर के कुछ हिस्सों में असामान्य सूजन हो सकती है। पैरों और टखनों में सूजन के साथ पेट से जुड़ी परेशानी, उल्टी, दस्त, मतली और तेज पेट दर्द जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में दिल की धड़कन तेज होना और सांस फूलने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
सरसों और सत्यानाशी के बीज में कैसे करें पहचान?
सत्यानाशी के बीज देखने में सरसों के बीज जैसे लग सकते हैं, इसलिए इनकी मिलावट पहचानना जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार सत्यानाशी के बीज अपेक्षाकृत अनियमित और खुरदरे होते हैं, जबकि सरसों के दाने अधिक गोल और चिकने होते हैं।
यदि घर में सरसों का तेल इस्तेमाल करने के बाद किसी व्यक्ति के पैरों में अचानक सूजन, पेट की परेशानी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तेल का इस्तेमाल तुरंत रोककर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
खुले तेल के इस्तेमाल में सावधानी जरूरी
स्वास्थ्य संबंधी सलाह के तौर पर खुले तेल की खरीद से बचने और घर में तेल को साफ एवं पारदर्शी कंटेनर में रखने की सलाह दी गई है। यदि तेल में किसी तरह की तलछट या संदिग्ध पदार्थ दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
अपने खेत की सरसों को कोल्हू में पेरवाने वालों को भी सरसों के दानों को अच्छी तरह साफ और छानकर ही तेल निकलवाने की सलाह दी गई है। बलिया की घटना ने एक बार फिर खाद्य तेल में मिलावट को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत सामने रखी है।
- Ballia-Satyanashi-Seed-Oil-Causes-Three-Deaths








