
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस ने विभिन्न मुद्दों को लेकर ‘चरखा सत्याग्रह आंदोलन’ आयोजित किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आंदोलन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधीवादी प्रतीक चरखे के माध्यम से विरोध दर्ज कराया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
आंदोलन को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत है, तो वह एक धार्मिक ट्रस्ट, विशेषकर राम मंदिर ट्रस्ट, का सदस्य कैसे हो सकता है। कांग्रेस नेता का तर्क था कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को निष्पक्षता और संस्थागत मर्यादा बनाए रखने के लिए ऐसे पदों से दूरी रखनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार के हितों के टकराव की आशंका न रहे।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर जनता का भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है और इसके लिए पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार से स्पष्टीकरण की मांग भी की।
वहीं, भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है। हालांकि, भोपाल में हुए इस चरखा सत्याग्रह ने एक बार फिर चुनाव आयोग, संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और सार्वजनिक पदों की मर्यादा को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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