
प्रशांत महासागर में लगातार मजबूत हो रहा अल नीनो इस साल मौसम का खतरनाक रूप दिखा रहा है। प्रशांत क्षेत्र में लगातार टाइफून और समुद्री तूफान बन रहे हैं, जिनसे अप्रैल से अब तक 230 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। चीन में जुलाई के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से करीब 8.5 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ। तूफानों का असर अब बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है।
प्रशांत में लगातार बढ़ रही तूफानों की गतिविधि
दुनिया के कई हिस्सों में इस समय मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो इस बदलाव को और गंभीर बना रहा है। इसके प्रभाव से प्रशांत क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों और टाइफून की गतिविधियां बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि अप्रैल से अब तक प्रशांत क्षेत्र में आए चक्रवातों से 230 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। आने वाले महीनों में भी इस क्षेत्र में तूफानों का सिलसिला जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।
सोमवार को एक और तूफान जापान के करीब पहुंचा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक नवंबर तक प्रशांत क्षेत्र में और भी तूफानी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इसका असर केवल समुद्र के आसपास रहने वाली आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, व्यापार, बंदरगाह और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
चीन को जुलाई में 8.5 अरब डॉलर का नुकसान
प्रशांत क्षेत्र में मौसम की मार से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में चीन भी शामिल है। अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में प्राकृतिक आपदाओं के कारण चीन को करीब 8.5 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ। लगातार आने वाले तूफानों के साथ भारी बारिश और बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को प्रभावित किया।
दक्षिणी चीन समेत कई क्षेत्रों में बाढ़, विस्थापन और बुनियादी ढांचे को नुकसान जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इन घटनाओं का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर क्षेत्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है।
बंदरगाहों पर बढ़ा दबाव, ग्लोबल ट्रेड प्रभावित
तूफानों की लगातार गतिविधि का असर समुद्री परिवहन पर भी पड़ा है। दुनिया की बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनियों में शामिल Maersk ने इस महीने एक एडवाइजरी जारी कर बताया कि लगातार आए गंभीर तूफानों के कारण क्षेत्र के कुछ प्रमुख बंदरगाहों पर कंजेशन बढ़ गया है। इससे मालवाहक जहाजों की समय पर पहुंचने की दर प्रभावित हुई है।
इसका सीधा असर उन वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है जो एशिया के प्रमुख बंदरगाहों और समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही धीमी होने से माल की डिलीवरी में देरी और परिवहन लागत बढ़ने की स्थिति बन सकती है।
अगस्त में रिकॉर्ड स्तर पर चक्रवाती गतिविधि
हांगकांग वेधशाला के अनुसार अगस्त में प्रशांत बेसिन और दक्षिण चीन सागर में 12 उष्णकटिबंधीय चक्रवात बने। 1961 के बाद किसी एक महीने में इतनी संख्या में चक्रवात बनने का यह सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है।
वहीं मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में कम से कम 17 सिस्टम ट्रॉपिकल स्टॉर्म की ताकत तक पहुंचे। इनमें छह तूफान आगे बढ़कर हरिकेन बने, जबकि चार ने मेजर हरिकेन का स्तर हासिल किया। इन चार तूफानों में हवा की रफ्तार 179 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक दर्ज की गई।
अल नीनो आखिर क्यों बढ़ाता है तूफानों का खतरा?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। समुद्र की इस अतिरिक्त गर्मी और वातावरण में होने वाले बदलावों का असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ता है।
2026 में अल नीनो जून में उभरने के बाद लगातार मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रशांत महासागर में समुद्र की गर्मी ऐसी परिस्थितियां बना रही है, जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए अनुकूल हैं। इसी वजह से इस साल प्रशांत क्षेत्र में तूफानी गतिविधियां सामान्य से ज्यादा दिखाई दे रही हैं।
अटलांटिक में तस्वीर बिल्कुल अलग
दिलचस्प बात यह है कि जहां प्रशांत महासागर में तूफानी गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहीं अटलांटिक महासागर में इस साल का शुरुआती मौसम इसके उलट काफी शांत रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अटलांटिक में 1941 के बाद सबसे शांत शुरुआत देखी गई है।
इस तरह दुनिया के दो प्रमुख महासागरों में मौसम की गतिविधियों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। एक तरफ प्रशांत में लगातार शक्तिशाली तूफान बन रहे हैं, वहीं अटलांटिक में चक्रवाती गतिविधि अपेक्षाकृत कम रही है।
आगे भी जारी रह सकता है असर
मौसम विशेषज्ञों की नजर अब आने वाले महीनों पर है। प्रशांत क्षेत्र में नवंबर तक और तूफानों की संभावना जताई गई है। वहीं अल नीनो के मजबूत होने से एशिया के कुछ हिस्सों में सूखा, अत्यधिक बारिश और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों, समुद्री व्यापार, मछली पालन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रशांत महासागर में बढ़ती तूफानी गतिविधियां आने वाले महीनों में दुनिया के लिए एक बड़ी मौसम और आर्थिक चुनौती बनी रह सकती हैं।
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