
बड़े शहर में एसडीएम के पद पर बैठे एक अफसर इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर परेशानी में घिरे नजर आ रहे हैं। साहब के खिलाफ बिल्डरों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें अब सरकार तक पहुंचने लगी हैं। खास बात यह है कि साहब के पास कॉलोनी सेल का प्रभार भी है, जिसके चलते बिल्डरों और कॉलोनी से जुड़े मामलों में उनका सीधा दखल रहता है। बिल्डरों का आरोप है कि इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर साहब सीनियर अफसरों के नाम पर कथित तौर पर वसूली का दबाव बनाते हैं। अब परेशान बिल्डरों ने सीधे सरकार का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। ऐसे में मामला केवल स्थानीय स्तर की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी जानकारी अब सरकार तक पहुंच चुकी है।
बताया जा रहा है कि साहब का विवादों से पुराना नाता रहा है। कभी भरी बैठक में जूनियर अफसर से तकरार हो जाती है तो कभी सीनियर अफसर से ही उलझने की नौबत आ जाती है। उनके व्यवहार को लेकर महकमे में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यही वजह है कि अब बिल्डरों की शिकायतों के सामने आने के बाद उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। बिल्डरों की ओर से यह आरोप लगाया जा रहा है कि सीनियर अफसरों के नाम का इस्तेमाल करके कथित तौर पर वसूली का दबाव बनाया जाता है। हालांकि इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का पक्ष खबर में सामने नहीं आया है, लेकिन शिकायतों के सरकार तक पहुंचने से प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
दिलचस्प यह है कि शिकायतों को लेकर साहब का रुख भी काफी बेफिक्र बताया जाता है। बिल्डरों से कथित तौर पर यहां तक कह देने की बातें सामने आ रही हैं कि शिकायतें करने से उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। अब सवाल यह है कि सरकार तक पहुंची इन शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या पूरे मामले को लेकर कोई जांच या संज्ञान लिया जाता है। फिलहाल बिल्डरों की शिकायतों और एसडीएम की कार्यशैली को लेकर महकमे में सवाल उठ रहे हैं। कॉलोनी सेल जैसे महत्वपूर्ण प्रभार के कारण बिल्डरों और कॉलोनी से जुड़े मामलों में एसडीएम की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है, इसलिए शिकायतों के सरकार तक पहुंचने के बाद इस पूरे मामले पर निगाहें टिक गई हैं।
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